लोकसभा चुनाव की समाप्ति के बाद अब सबकी नजर चार जून को होने वाली मतगणना पर टिक गई है, यह अलग बात है कि एग्जिट पोल ने स्पष्ट कर दिया है कि मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले हैं। इसलिए भाजपा के समर्थक अब पूरी तरह से मान चुके हैं कि केंद्र में एक बार नरेंद्र मोदी की सरकार आ रही है, अब उनकी चिंता सरकार बनाने को लेकर नहीं है, बल्कि जीत की संख्या को लेकर है। भाजपा के कट्टर समर्थक चाहते हैं कि एनडीए को चार सौ से ज्यादा सीट मिले ताकि बनने वाली उनकी सरकार अपने मन के मुताबिक कार्य कर सके। उल्लेखनीय है कि सभी प्रमुख एजेंसियों ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में फिर से नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) सरकार बनने की बात कही है। एग्जिट पोल में भाजपा को पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भारी बढ़त मिलने के आसार बताए गए हैं। इसके अलावा दक्षिण भारतीय राज्यों तमिलनाडु और केरल में भी खाता खुलने की बात कही गई है। भाजपा ने आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू की तेलगुदेशम पार्टी और पवन कल्याण की जनसेना पार्टी के साथ गठबंधन किया है। पोल एजेंसियों के मुताबिक आंध्र प्रदेश की अधिकतर सीटें एनडीए के खाते में जाएंगी। प्रमुख एक्जिट पोल्स में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन और विपक्षी इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस (इंडिया) गठबंधन को मिलने वाली सीटों की संख्या यूं बताई है। 543 सदस्यों वाली लोकसभा में बहुमत का आंकड़ा 272 है। एग्जिट पोल्स में भाजपा अपने बूते बहुमत का आंकड़ा फिर एक बार पार कर रही है। 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा को 303 और उसके नेतृत्व में एनडीए को कुल 353 सीटें मिली थीं। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस को 52 सीटें मिली थीं। अन्य बड़ी पार्टियों में डीएमके को 23, वाईएसआरसीपी को भी 23 और तृणमूल कांग्रेस को 22 सीटें मिली थीं। विभिन्न पोल एजेंसियों के अनुसार मौजूदा मुख्यमंत्री वाईएसआर जगन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस पार्टी फिर से आंध्र प्रदेश में सरकार बना सकती है। वाईएसआर कांग्रेस को 175 सदस्यों वाली विधानसभा में 130-145 सीटें मिलने का अनुमान जताया जा रहा है वहीं विपक्षी तेलुगूदेशम पार्टी, भारतीय जनता पार्टी और जन सेना गठबंधन 30 से 45 सीटें जीत सकता है। ओडिशा की 147 विधानसभा सीटों पर फिर से बीजू जनता दल को बढ़त मिलने का अनुमान है। इंडिया टुडे-माय ऐक्सिस के मुताबिक बीजेडी को 92-98 सीटें और भाजपा को 40-51 सीटें मिलने की उम्मीद है। ऐसा होता है तो नवीन पटनायक लगातार छठी बार राज्य के मुख्यमंत्री बन सकते हैं। 60 सीटों वाली अरुणाचल प्रदेश विधानसभा में भाजपा बिना लड़े सर्वसम्मति से पहले ही 10 सीटें जीत चुकी हैं और मतगणना के बाद स्पष्ट हो गया है कि अरुणाचल में एक बार फिर भाजपा की सरकार बनने जा रही है। 2019 के विधानसभा चुनाव में मौजूदा मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग की पार्टी सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा ने जीत दर्ज कर दो दशक से ज्यादा समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले पवन चामलिंग का कार्यकाल खत्म किया था और आज रविवार को हुई मतगणना में तमांग की पार्टी ने 32 में से 31 सीटें जीतकर नया इतिहास बनाया है। दो और विधानसभाओं को चुनाव हुआ है, उनमें ओडिसा और आंध्र प्रदेश भी शामिल है। वैसे देखा जाए तो इस बार किसी भी पार्टी के समर्थन में लहर नहीं थी। चुनाव में लोगों की रुचि भी कम थी। पिछली बार की अपेक्षा इस बार मत प्रतिशत भी कम आंके गए। फिर भी एनडीए की बढ़त सामने आ रही है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि वास्तविकता का पता मतगणना के बाद होगा, परंतु भाजपा और एनडीए के पक्ष में जिस तरह के कयास व्यक्त किए जा रहे हैं, उन्हें नकारना आसान नहीं है। कारण कि विपक्ष को जिस गंभीरता के साथ चुनाव लड़ना चाहिए, उसने उस तरह की तैयारी नहीं की, हर कार्य में देरी की, जिसका असर चुनाव अभियान में प्रत्यक्ष रूप से पड़ा, जबकि भाजपा ने बड़ी तैयारी के साथ चुनाव लड़ा। हरेक लोकसभा सीटों की यथास्थिति का विश्लेषण कर टिकट का वितरण किया। जहां जरूरत पड़ी वहां से उम्मीदवार हटाकर नए व्यक्ति को उम्मीदवार बनाया गया। दिल्ली में छह पुराने उम्मीदवारों को टिकट न देना इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
एग्जिट पोल के नतीजे
