लोकसभा चुनाव के सातवें व अंतिम चरण के लिए चुनाव प्रचार 30 मई की शाम 5 बजे समाप्त हो गया है।  एक जून को मतदान होगा। सात राज्यों और चंडीगढ़ के 57 संसदीय क्षेत्रों के लिए कुल 904 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश और पंजाब से 13-13, पश्मिच बंगाल से नौ, बिहार से आठ, ओडिसा से छह, हिमाचल प्रदेश से चार, झारखंड से तीन तथा केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के एक लोकसभा क्षेत्रों के लिए मतदान होगा। सातवें चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, बालीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत, केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल, महेंद्र नाथ पांडे एवं अनुराग ठाकुर मैदान में हैं। उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल के 13 सीटों के लिए घमासान मचा हुआ था, जिसे सियासी पारा सातवें आसमान पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2019 में उत्तर प्रदेश वाराणसी से 479505 मतों से विजयी हुए थे। पश्चिम बंगाल का डायमंड हार्बर भी सियासी अखाड़ा बना हुआ है क्योंकि यहां टीएमसी की प्रतिष्ठा दांव पर है। बिहार के काराकर सीट भी भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ है क्योंकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा के लिए फिल्म स्टार पवन सिंह राहु-केतु बने हुए हैं। हिमाचल प्रदेश के मंडी लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार कंगना रनौत को हराने के लिए कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह को टिकट देकर अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। अब तक लोकसभा के छह चरणों का चुनाव हो चुका है। अब तक कुल 486 सीटों के लिए हुए चुनाव में कुल 8360 उम्मीदवार मैदान में हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म (एडीआर) की रिपोर्ट ने इनमें से 8337 उम्मीदवारों का विश्लेषण किया है जिसमें 2572 उम्मीदवार करोड़पति बताए जाते हैं जो कुल उम्मीदवार का 31 प्रतिशत है। विभिन्न राजनीतिक पार्टियों ने वर्ष 2014 के चुनाव में अब तक  कुल 10 प्रतिशत महिला उम्मीदवारों को ही टिकट दिया है। अब तक के उम्मीदवारों में से 1683 उम्मीदवारों पर विभिन्न श्रेणी के आपराधिक मामले दर्ज हैं जिसमें 1191 उम्मीदवारों पर गंभीर मामले जैसे हत्या करने, हत्या का प्रयास करने, महिलाओं के खिलाफ एवं नफरती भाषण जैसे मामले दर्ज हैं। 16 के खिलाफ दुष्कर्म जैसे मामले दर्ज हैं। एडीआर ने उम्मीदवारों द्वारा कोर्ट में दाखिल किए गए हलफनामे के आधार पर अपनी रिपोर्ट बनाई है। अगर पार्टीवार देखे तो भाजपा के कुल 440 उम्मीदवारों में 191 पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जो भाजपा की कुल संख्या का 43 प्रतिशत है। कांग्रेस भी पीछे नहीं है। कुल 327 उम्मीदवारों में से 143 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज है जो कुल संख्या 44 प्रतिशत है। इसी तरह बहुजन समाज पार्टी के 13 प्रतिशत, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के 63 प्रतिशत तथा निर्दलीय के 14 प्रतिशत उम्मीदवारों के खिलाफ मामले दर्ज है। इसी तरह भाजपा के 404 में से 403, कांग्रेस के 327 में 292 उम्मीदवार करोड़पति हैं। एडीआर के अनुसार 324 उम्मीदवार दोबारा लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। वर्ष 2019 के मुकाबले इन उम्मीदवारों की संपत्ति में 43 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्ष 2009 से लेकर 2024 तक  सियासी दलों की संख्या में 104 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्ष 2009 में देश में कुल सियासी दलों की संख्या 368 थी, जो 2024 में बढ़कर 751 हो गई है। वर्ष 2024 के चुनाव में 979 महिला उम्मीदवार मैदान में हैं।  8360 उम्मीदवारों में से 42 प्रतिशत उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता पांचवीं से लेकर 12वीं के बीच है। इसी तरह 46 उम्मीदवारों ने अपने हलफनामे में शून्य संपत्ति घोषित की है। इसी तरह आंध्र प्रदेश के गंटूर क्षेत्र से तेलुगु देशम पार्टी के उम्मीदवार डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी सबसे धनी उम्मीदवार है जिनके पास कुल 5705 करोड़ की संपत्ति है। दूसरे स्थान पर तेलंगाना के चेवेलम्मा क्षेत्र से भाजपा के उम्मीदवार कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी हैं, जिनके पास 4568 करोड़ की संपत्ति है। कुल मिलाकर सातवां चरण सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ है।