नई दिल्ली : पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में महंगाई को लेकर इन दिनों हिंसा जारी है। भारत भी लगातार वहां की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। इस बीच, भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी पीओके के वर्तमान हालात पर प्रतिक्रिया दी है। भारत ने कहा कि यह विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान द्वारा पीओके से संसाधनों की प्रणालीगत लूट की निरंतर नीति का स्वाभाविक परिणाम है। इसके साथ ही भारत ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के संपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न अंग थे , हैं और रहेंगे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने अपनी साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि हमने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन की रिपोर्ट देखी है।

उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि यह इन क्षेत्रों से संसाधनों की प्रणालीगत लूट की पाकिस्तान की निरंतर नीति का एक स्वाभाविक परिणाम है जो उसके जबरन और अवैध कब्जे में है। उन्होंने कहा कि ऐसी शोषणकारी नीतियां स्थानीय लोगों को उनके अपने संसाधनों पर अधिकार और उसके लाभों से वंचित करती हैं। ऐसे में लोगों का प्रतिरोध करना स्वाभाविक है। आगे बोलते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पीओके में रहने वाले एक व्यक्ति की तुलना जम्मू-कश्मीर में रहने वाले किसी व्यक्ति से नहीं की जा सकती है। भारत वाले जम्मू-कश्मीर के लोग आज वास्तव में प्रगति कर रहे हैं, जबकि पीओके वाले हिस्से में स्थिति बदतर हो चुकी है। बता दें कि दो दिन पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर भारत का हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। इस महीने की शुरुआत में, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि भारत पीओके पर अपना दावा कभी नहीं छोड़ेगा।