पहले, दूसरे और तीसरे चरण की तरह चौथे चरण में भी वर्ष 2019 के मुकाबले इस बार कम मतदान हुआ है। इसको लेकर विभिन्न राजनीतिक पार्टियो के नेता अपने-अपने हिसाब से व्याख्या कर रहे हैं। कुल मिलाकर मतदान का प्रतिशत घटना लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है। चौथे चरण में देश के 10 राज्यों के 96 सीटों के लिए मतदान हुआ। अब तक 379 सीटों के लिए मतदान हो चुका है। अब तक कुल 1717 उम्मीदवारों का भाग्य ईवीएम में बंद हो चुका है। सबसे आश्चर्य की बात यह है कि उत्तर प्रदेश और बिहार में मतदान का प्रतिशत लगातार गिर रहा है। बिहार को राजनीतिक रूप से काफी जागरूक राज्य माना जाता है किंतु मतदान में कमी कई तरह प्रश्न खड़े कर रहे हैं। मतदान के गिरते प्रतिशत से सत्तारूढ़ भाजपा के साथ-साथ विपक्ष भी चिंतित है। प्रधानमंत्री ने मतदाताओं को जागरूक करने के लिए पटना, वाराणसी तथा देश के कई अन्य भागों में रोड शो भी किया ताकि लोगों का रूझान बढ़ सके। चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ ही नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तीखा होता जा रहा है तथा मुद्दे भी लगातार बदल रहे हैं। चौथे चरण में समाजवादी पार्टी के सुप्रीमों अखिलेश यादव सहित मोदी सरकार के छह केंद्रीय मंत्री की प्रतिष्ठा दाव पर लगी है।  चौथे चरण में अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश की कन्नौज सीट से मैदान में हैं, जबकि केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टोनी (खीरी), साक्षी महाराज (उन्नाव), नित्यानंद राय (उजियारपुर), गिरीराज सिंह (बेगूसराय), असुदुद्दीन ओवैसी (हैदराबाद), अर्जुन मुंडा (खूंटी), अधीर रंजन चौधरी (बहरामपुर), शत्रुघ्न सिंहा (आसनसोल), किर्ति आजाद (वर्द्धमान-दुर्गापुर) तथा जी किशन रेड्डी (सिकंदराबाद) से प्रतिद्वंद्विता कर रहे हैं। प्रथम चरण के बाद से ही विकास के मुद्दे गौण होने लगे हैं। उसकी जगह हिंदू-मुस्लिम, आरक्षण तथा पाकिस्तान का मुद्दा सामने आ गया है। कांग्रेस के नेता सैम पित्रोदा एवं मणिशंकर अय्यर ने अपने विवादित बयान से भाजपा को मुद्दा दे दिया है। मुस्लिम आरक्षण को लेकर भाजपा लगातार कांग्रेस पर हमलावर है। दूसरी तरफ कांग्रेस बेरोजगारी एवं महंगाई के मुद्दे पर मोदी सरकार को लगातार घेरने में लगी है। बाकी के तीन चरणों के लिए भाजपा ने 14 मई को वाराणसी में अपना शक्ति प्रदर्शन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नामांकन में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के नेताओं का जमावड़ा लगा। भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री के अलावा गृहमंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सभी घटक दल के बड़े नेता वाराणसी पहुंचे थे। अगप के अध्यक्ष अतुल बोरा, यूपीपीएल के सुप्रीमो प्रमोद बोड़ो, तेलगु देशम पार्टी के अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू, एनपीपी के प्रमुख एवं मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सहित सभी नेता उपस्थित थे। प्रधानमंत्री ने एक दिन पहले वाराणसी में रोड शो किया था, जिसमें भारी संख्या में लोग उनकी झलक पाने के लिए बेताव दिख रहे थे। आज भी जुलूस के रूप में प्रधानमंत्री जिला मुख्यालय पहुंचे तथा अपना नामांकन दाखिल किया। आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो तथा दिल्ली के मख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के जेल से बाहर आने के बाद भाजपा की चुनौती बढ़ गई है। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव प्रचार के लिए केजरीवाल को एक जून तक जमानत दी है। केजरीवाल के बाहर आने से आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ा है। केजरीवाल ने बाहर निकलने के साथ ही भाजपा पर ताबड़तोड़ हमला शुरू कर दिया है। मतदाताओं पर इसका कितना असर होगा यह तो कहना मुश्किल है। कांग्रेस के लिए भी केजरीवाल का बाहर आना अच्छा संकेत नहीं है। पंजाब में कांग्रेस तथा आम आदमी पार्टी के बीच मुकाबला है। केजरीवाल के बाहर आने से कांग्रेसी उम्मीदवारों के लिए पंजाब में निश्चित रूप से परेशानी बढ़ेगी। यही कारण है कि अभी तक कांग्रेस ने केजरीवाल की रिहाई पर ऐसा उत्साह नहीं दिखाया है जैसा इंडी गठबंधन के दूसरे दल दिखा रहे हैं। केजरीवाल का प्रभाव पांचवें, छठे एवं सातवें चरण पर पड़ सकता है। भाजपा अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए लगातार जोर लगा रही है तथा अपनी रणनीति में परिवर्तन कर रही है।