पूर्वांचल प्रहरी कार्यालय संवाददाता
डिब्रूगढ़ः बराक घाटी में लगातार बांग्ला व असमिया भाषा को लेकर उपजे विवादों को राज्य को खंडित करने का षड्यंत्र बताते हुए असम साहित्य सभा के पूर्व अध्यक्ष व साहित्यकार नगेन सैकिया ने बराक घटी को असम से अलग कर पृथक राज्य का मर्यादा प्रदान करने की मांग की। असमिया भाषा का लगातार हो रहे अपमान से आहत साहित्यकार नगेन सैकिया ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि बराक घाटी में असमिया और असमिया विरोधी भावनाओं में धीरे-धीरे वृद्धि हो रही है, जिसमें भाजपा के कार्यकर्ता भी जुड़े हुए हैं। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि बराक घाटी को पृथक राज्य बना देने से ही संभवतः यह संघर्ष खत्म होगा। असम साहित्य सभा के पूर्व अध्यक्ष हितेश डेका ने एक बार कहा था कि कछार असम के लिए कैंसर स्वरूप है। साहित्य सभा के एक अन्य पूर्व अध्यक्ष डॉ. महेंद्र बायो को लगाता था कि कछार को अलग करने की आवश्यकता होने की बात भी सोची थी। अगर शरीर का कोई अंग रोगग्रस्त हो जाए तो उसको काटने की जगह उसे स्वस्थ करने पर जोर देना चाहिए। डॉ. ब्रावा उरिया ने जवाब दिया, यह मत भूलिए कि भाइयों के बीच संघर्ष होने पर भी मिट्टी अलग-अलग में बंट जाती है। असम के लोगों का इस मुद्दे पर विचार करना जरूरी है। सन् 1966 में जब बराक घाटी में असम साहित्य सभा की ओर से कविराज हरेश चंद्र भट्टाचार्य को सम्मानित करने के लिए गए थे,उसी समय बराक घाटी के 24 गांवों में असमिया भाषियों की उपस्थिति की बात मालूम चली थी।