इन दिनों चुनावी सरगर्मी उफान पर है। परिणामतः  धरती और जल के साथ राजनीतिक माहौल भी गरम है। इसी कड़ी में भाजपा और कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने अपने घोषणा-पत्र जारी कर दिए हैं। भाजपा ने अपने घोषणा पत्र को संकल्प पत्र और कांग्रेस ने न्याय पत्र नाम दिया है। दोनों पार्टियों ने अपने घोषणा पत्र में ‘युवाओं, किसानों और महिलाओं को सबसे आगे जगह दी है। वहीं, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन को सबसे आखिर में जगह मिली है,इससे दोनों पार्टियों की प्राथमिकता का अंदाजा लगाया जा सकता है। भाजपा के घोषणा पत्र का अंतिम विषय ‘पर्यावरण अनुकूल भारत है, इसमें कहा गया है कि पार्टी 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने के लिए तेजी से काम करेगी। दूसरी ओर कांग्रेस ने 2070 तक नेट जीरो का लक्ष्य हासिल करने के लिए राज्य सरकारों और निजी क्षेत्र के साथ मिलकर ग्रीन ट्रांजिशन फंड ऑफ इंडिया की स्थापना करने का वादा किया है। कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम को मजबूत करने की बात कही है। कांग्रेस ने वादा किया है कि वह नदियों में अपशिष्ट पदार्थों के प्रवाह को रोकने के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करेगी। साथ ही नदियों में अपशिष्ट प्रवाहित करने पर कानूनन रोक लगाएगी। इसके अलावा दस सालों के भीतर सभी कस्बों और नगर पालिकाओं में सीवेज के सुरक्षित निपटान का व्यापक कार्यक्रम लागू किया जाएगा। इस मुद्दे पर भाजपा का कहना है कि वो सभी प्रमुख नदियों को चरणबद्ध तरीके से स्वच्छ बनाएगी। साथ ही उनके बेसिन संरक्षण और पुनर्जीवन में तेजी लाएगी। इसके अलावा नदियों का प्रदूषण कम करने के लिए राज्य सरकारों की मदद करेगी। भाजपा ने वादा किया है कि पार्टी हर क्षेत्र में जैव विविधता की रक्षा और संरक्षण करेगी।  साथ ही वृक्ष आवरण को बढ़ाकर कार्बन सिंक के लक्ष्य को हासिल करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। वहीं, कांग्रेस ने कहा है कि वो वन क्षेत्र को बढ़ाने के लिए राज्य सरकारों के साथ काम करेगी। साथ ही वनीकरण में स्थानीय समुदायों को शामिल करेगी। कांग्रेस ने वादा किया है कि पहाड़ी जिलों में भूस्खलन का अध्ययन करने और इन घटनाओं को रोकने के उपाय निकालने के लिए उच्च स्तरीय समिति नियुक्त करेगी। वहीं, भाजपा ने हिमालयी राज्यों में आने वाली आपदाओं से बचाव के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाने की बात कही है। बीजेपी ने वादा किया है कि वह बिजली उत्पादन में गैर-जीवाश्म स्त्रोतों की हिस्सेदारी बढ़ाएगी।  इलेक्टि्रक वाहनों को बढ़ावा देगी। इसके अलावा इलेक्टि्रक मोबिलिटी, नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता के जरिए देश को 2047 तक ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की बात भी कही है। बीजेपी ने परमाणु ऊर्जा का उत्पादन, पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण और हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता को बढ़ाने का भी वादा किया है। इसके अलावा भारत को पवन, सौर और हरित हाइड्रोजन के क्षेत्र में वैश्विक उत्पादन केंद्र बनाने की बात भी कही है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने कहा है कि वह हरित ऊर्जा को बढ़ावा देगी। नवीकरण ऊर्जा योजनाएं लागू करेगी, जिससे पंचायत और नगर पालिका को बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनाया जा सके । बीजेपी ने पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के जरिए सौर ऊर्जा उपलब्ध कराने की बात कही है। साथ ही कांग्रेस ने कहा है कि वह पंचायतों को सौर ग्रिड लगाने और उन्हें बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करेगी। साथ ही पानी निकालने वाले ट्यूबवेलों पर सौर ऊर्जा पैनल लगवाने के लिए एक कार्यक्रम शुरू करेगी। बीजेपी ने शहरों को पर्यावरण अनुकूल बनाने, जल निकायों को पुनर्जीवित करने, खुले कचरास्थलों को खत्म करने, ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने और ई-वेस्ट मैनेजमेंट मिशन शुरू करने की बात कही है। वहीं, कांग्रेस ने एक स्वतंत्र पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन प्राधिकरण का गठन करने का वादा किया है। इनके अलावा दोनों ही पार्टियों ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और तटीय क्षेत्रों के संरक्षण की बात कही है।  उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी (एसपी) ने अपने घोषणा पत्र में कहा है कि गंगा और जमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण नियंत्रण पर राष्ट्रीय चार्टर और नीति बनाई जाएगी। इसके अलावा 2029 तक निर्माण उद्योग के लिए प्राकृृतिक संसाधनों के खनन को चरणबद्ध तरीके से खत्म किया जाएगा। इसकी जगह पर्यावरण के अनुकूल तकनीक को बढ़ावा दिया जाएगी।