पश्चिम बंगाल में इस बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तथा सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बीच सीधा मुकाबला है। कांग्रेस तथा वामपंथी पार्टियां तीसरे और चौथे स्थान की दावेदार हो सकती हैं। वर्ष 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में सत्ताधारी टीएमसी को 42 में से 22 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि 18 सीटें भाजपा के खाते में गई थी। इस बार भाजपा 2019 के मुकाबले और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए पूरा जोर लगा रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय मंत्री अमित शाह तथा भाजपा के अन्य शीर्ष नेता लगातार बंगाल के दौरा करते रहे हैं। पश्चिम बंगाल के बक्सीरहाट के संदेशखाली गांव की घटना ने भाजपा को ममता सरकार को घेरने का पूरा मौका दिया है।
टीएमसी नेता शेख शाहजहां की काली करतूत ने ममता सरकार को निश्चित रूप से बैकफुट पर धकेल दिया है। अब तो कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी संदेशखाली घटना की जांच सीबीआई से कराने का निर्देश दे दिया है। पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), एनआरसी तथा समान नागरिक संहिता (यूसीसी) बड़ा मुद्दा बन गया है। इन मुद्दों पर भाजपा और टीएमसी आमने-सामने आ गई है। भाजपा ने अपने घोषणा-पत्र में सीएए को लागू करने की बात दोहराई है, जबकि देश में यूसीसी लागू करने का वादा किया है।
भाजपा ने अपने घोषणा-पत्र में एनआरसी के मुद्दे पर चुप्पी साध ली है। टीएमसी ने अपने घोषणा-पत्र में सीएए, एनआरसी तथा यूसीसी लागू नहीं होने देने का वादा किया है। इधर केंद्र सरकार का कहना है कि पश्चिम बंगाल में सीएए जरूर लागू होगा। इस पूरे मामले पर वोट बैंक की राजनीति काम कर रही है। पश्चिम बंगाल में 27 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है।
ममता मुस्लिम आबादी को अपने पाले में रखने के लिए सीएए, एनआरसी तथा यूसीसी के खिलाफ बयान देकर उनको खुश करने का प्रयास कर रही है। पश्चिम बंगाल घुसपैठियों का शरणस्थली बन चुका है। इधर भाजपा हिंदू वोट बैंक पर सीधी नजर रखते हुए हिंदू समाज की आवाज को उठाने का पूरा प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम बंगाल की यात्रा के दौरान ममता सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा था कि उनके शासन में पश्चिम बंगाल घुसपैठियों की पसंदीदा जगह बन गया है। उन्होंने टीएमसी के लूट एवं भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति पर निशाना साधा। मालूम हो कि रामनवमी के अवसर पर जुलूस निकालने के लिए पश्चिम बंगाल की जनता को कोर्ट से अनुमति लेनी पड़ी है।
भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान इस मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया है। पश्चिम बंगाल में मतुआ समाज की आबादी 17 प्रतिशत है। सीएए लागू होने से सबसे ज्यादा फायदा मतुआ समुदाय को होगा। यह समुदाय भाजपा का वोट बैंक माना जाता है। वर्ष 2014 से पश्चिम बंगाल में भाजपा का वोट शेयर लगातार बढ़ता जा रहा है। वर्ष 2014 में भाजपा का वोट शेयर जहां 17.12 प्रतिशत था वो वर्ष 2019 में बढ़कर 40.6 प्रतिशत हो गया। भाजपा वोट प्रतिशत दो प्रतिशत और बढ़ाने के लिए प्रयासरत है। अगर ऐसा हो गया तो मुकाबला बराबरी पर आ सकता है। कुल मिलाकर पश्चिम बंगाल में मुकाबला रोचक होने वाला है।