ईरान द्वारा इजरायल पर सीधा हमला करने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। अब इजरायल ने जवाबी कार्रवाई करने की धमकी दी है। सबको पता है कि इजरायल अपने दुश्मनों को कभी भी छोड़ता नहीं है। ईरान ने शनिवार की रात 185 ड्रोन और 145 मिसाइलों से इजरायल पर हमला किया था। लेकिन इजरायल के आयरन डोम सहित विभिन्न डिफेंस सिस्टम ने लगभग सभी हमले को नाकाम कर दिया। अमरीका की डिफेंस सिस्टम ने भी इजरायल की मदद की। ईरान ने एक साथ लेबनान, सीरिया एवं यमन से हमला किया था। इस घटना के बाद मध्य-पूर्व में तनाव काफी बढ़ गया है। अगर इजरायल जवाबी हमला करता है तो यहां से तीसरे विश्व युद्ध होने का खतरा बढ़ सकता है। पिछले 1 अप्रैल को सीरिया स्थित ईरान के दूतावास पर हमला हुआ था जिसमें ईरान के दो शीर्ष कमांडर सहित कुल 13 लोगों की मौत हो गई थी। ईरान ने इसके लिए इजरायल को दोषी ठहराया है। उसके बाद से ही ईरान बदला लेने के लिए तैयारी में था। हालांकि इजरायल-हमास युद्ध शुरू होने के बाद से ही ईरान और इजरायल के बीच तनातनी बढ़ गई थी। अक्तूबर 2023 से ही इजरायल-हमास युद्ध चल रहा है। इजरायल का मानना है कि ईरान हमास को हथियार एवं गोला-बारूद की आपूर्ति कर रहा है। इसके अलावा लेबनान के लड़ाकों तथा यमन के हुती विद्रोहियों को भी ईरान सहयोग एवं समर्थन दे रहा है। ईरान लगातार इजरायल के खिलाफ बयानबाजी भी कर रहा है। दोनों देशों के बीच दुश्मनी जगजाहिर है। 1979 में ईरान में इस्लामिक क्रांति के बाद दोनों देशों के बीच दूरियां बढ़ने लगी। इसका कारण यह है कि ईरान के राजवंश शासन का खात्मा हो गया। उसके बाद इस्लामिक तरीके से शासन शुरू हो गया। इजरायल को सुरक्षा देने के लिए अमरीका ने अपने युद्धपोतों को भूमध्य सागर में तैनात कर दिया है। अमरीकी युद्धपोतों ने भी ईरान के कई हमले को नाकाम किया। अब पूरी दुनिया की नजर मध्य-पूर्व पर है। सुरक्षा परिषद एवं संयुक्त राष्ट्रसंघ के महासचिव ने भी संभावित ईरान-इजरायल युद्ध को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। इसको लेकर मध्य-पूर्व के देश भी अलग-अलग खेमे में बंटने लगे हैं। कतर और कुवैत जैसे अमरीकी समर्थक देश भी ईरान के खिलाफ अमरीका को अपने एयर स्पेस के उपयोग की अनुमति देने को तैयार नहीं हैं। अगर दोनों देशों के बीच युद्ध छिड़ता है तो वह भयानक रूप ले सकता है। ईरान भी लगातार युद्ध की तैयारी में जुटा हुआ है। इजरायल पहले से ही अपनी पूरी तैयारी में है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह युद्ध परमाणु युद्ध में बदल सकता है, जो दुनिया के लिए विनाशकारी साबिता होगा। भारत के लिए भी कठिन चुनौती होगी, क्योंकि ईरान एवं इजरायल दोनों भारत के मित्र देश हैं। भारत की कोशिश होगी कि मामला आगे नहीं बढ़े। अगला कुछ दिन मध्य-पूर्व के लिए कठिन समय होगा।
ईरान-इजरायल आमने-सामने
