आजकल की लाइफस्टाइल में बिना टीवी और मोबाइल के जिंदगी की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। लोग घंटों में टीवी, मोबाइल पर अपना वक्त गुजारते हैं। मोबाइल स्क्रीन टाइम तो टीवी के मुकाबले कहीं ज्यादा होता है। सारे काम ऑनलाइन हो जाने और सोशल मीडिया की वजह से लोगों का ज्यादातर समय अब मोबाइल पर बीतने लगा है। जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम बढ़ने का असर फिजिकल और मेंटल हेल्थ पर भी दिखाई पड़ने लगा है। स्क्रीन टाइम बढ़ने से शरीर में कई परेशानियां देखी जाने लगी हैं। वैलीवाइज़हेल्थडॉटओआरजी के मुताबिक ज्यादा वक्त मोबाइल, टीवी के साथ गुजारने पर लोगों में नींद से जुड़ी समस्याएं बढ़ने लगी है।
स्क्रीन टाइम बढ़ने के 4 बड़े नुकसान- मोटापा : युवाओं में तेजी से मोटापा बढ़ने की समस्या देखी जाने लगी है। बहुत से बच्चे दिनभर टीवी देख रहे हैं या वीडियो गेम खेल रहे हैं, इसके चलते उनमें मोटापे का रिस्क बढ़ गया है। फिजिकल एक्टिविटी न होने और बॉडी कैलोरी बर्न न हो पाने की वजह से ऐस हो रहा है। मोटापा बढ़ने से दिल की सेहत भी प्रभावित होने लगी है। मोटापा डायबिटीज, हाई बीपी और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने जैसे खतरों को भी बढ़ाता है। नींद न आने की समस्या : कभी बढ़ती उम्र की परेशानी माने जाने वाली नींद न आने की समस्या अब हर एज में दिखाई देने लगी है। ज्यादा स्क्रीन टाइम होने के चलते नींद पर इसका खासा नकारात्मक असर दिखाई देने लगा है। मोबाइल, लैपटॉप, टीवी से निकलने वाली ब्लू लाइट ब्रेन की स्लीप साइकिल को डिस्टर्ब करती है और अच्छी नींद आने से रोकती है। गर्दन, पीठ दर्द : ज्यादा देर तक मोबाइल देखने, लैपटॉप चलाने की वजह से सही पोश्चर का ध्यान नहीं रहता है। लंबे वक्त तक खराब पोश्चर में रहने पर लोगों में गर्दन और पीठ में तेज दर्द की समस्या पैदा होने लगती है। डिप्रेशन, एंजाइटी : स्क्रीन टाइम बढ़ने का असर फिजिकल हेल्थ के साथ मेंटल हेल्थ पर भी पड़ता है। इसके चलते डिप्रेशन और एंजाइटी के मामले भी बढ़े हैं। एक्सपर्ट कहते हैं कि स्क्रीन टाइम बढ़ने की वजह से आने वाला डिप्रेशन सुसाइडल बिहेवियर को बढ़ावा देता है।