लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने शुक्रवार को अपने घोषणा को न्याय पत्र के रूप में जारी करते हुए गरीब महिलाओं को सालाना एक लाख रुपए देने, जातिगत जनगणना कराने तथा किसानों के लिए एमएसपी कानून लागू करने सहित विभिन्न वादों के साथ चुनावी मैदान में उतरने की घोषणा की है। अपने घोषणा पत्र में कांग्रेस ने 10 न्याय का जिक्र किया है जिनके नाम क्रमशः हिस्सेदारी न्याय, किसान न्याय, नारी न्याय, श्रमिक न्याय, युवा न्याय, संविधान न्याय, आर्थिक न्याय, राज्य न्याय, रक्षा न्याय एवं पर्यावरण न्याय हैं। इसी के आधार पर कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र को तैयार किया है। पार्टी ने आरक्षण की सीमा बढ़ाकर 50 प्रतिशत से अधिक करने तथा चुनावी बांड, राफेल एवं पेगासस जैसे भ्रष्टाचार के मामले की जांच कराने का वादा किया है। घोषणा पत्र में ऊपरी न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए राष्ट्रीय न्याय आयोग गठित करने का भी वादा किया गया है। कांग्रेस का कहना है कि लोकसभा का वर्तमान चुनाव संविधान और लोकतंत्र को नष्ट करने का प्रयास करने वालों और इन्हें बचाने वालों की कोशिश करने वालों के बीच होने जा रहा है। कांग्रेस ने ये भी वादा किया है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को मिलने वाले 10 प्रतिशत आरक्षण को सभी वर्गों के गरीबों के लिए बिना भेदभाव के लागू किया जाएगा। नई शिक्षा नीति को लेकर भी कांग्रेस ने कहा है कि राज्य सरकारों के साथ परामर्श कर इसमें संशोधन किया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भ्रष्टाचार के मामलों से बचने के लिए कांग्रेस तथा दूसरे दलों से भाजपा में शामिल हुए नेताओं के मामले को फिर से खोला जाएगा और जांच कराई जाएगी। युवा न्याय के तहत 30 लाख सरकारी नौकरियां देने और युवाओं को एक साल के लिए प्रशिक्षुता कार्यक्रम के तहत एक लाख रुपए देने का वादा भी शामिल है। घोषणा पत्र में कर्ज माफी आयोग के गठन तथा जीएसटी मुक्त खेती का वादा भी शामिल है। कांग्रेस ने श्रमिक न्याय के तहत मजदूरों को स्वास्थ्य का अधिकार देने, न्यूनतम मजदूरी 400 रुपए सुनिश्चित करने और शहरी रोजगार गारंटी का वादा किया है। अगले 10 वर्ष में भारत की जीडीपी को दोगुना करने का भी लक्ष्य रखा गया है। घोषणा पत्र में रक्षा बलों के लिए वन रैंक वन पेंशन को सही रूप में लागू करने तथा उसमें व्याप्त विसंगतियों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा। कांग्रेस के इस घोषणा पत्र को लेकर सियासत भी शुरू हो गई है। भाजपा ने इसे झूठ का पुलिंदा बताते हुए नकार दिया है। प्रत्येक गरीब परिवार को प्रतिवर्ष एक लाख रुपए देने का वादा चुनावी जुमले के अलावा कुछ भी नहीं है। यह सबको मालूम है कि देश की आर्थिक स्थिति के मद्देनजर यह वादा पूरा करना संभव नहीं है। और भी कई वादे हैं जो चुनावी घोषणा बनकर ही रह जाएंगी। कांग्रेस पिछले कुछ महीनों से बिखराव के दौर से गुजर रही है। पिछले 22 जनवरी से अभी तक 50 से ज्यादा कांग्रेसियों ने पार्टी छोड़कर दूसरे दलों का दामन थाम लिया है। कई राज्यों के पूर्व मुख्यमंत्रियों ने भी पाल बदल लिया है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस को सबसे पहले अपनी पार्टी को एकजुट करते हुए बिखराव को रोकना होगा। कई राज्यों में जहां कांग्रेस का सहयोगी दलों के साथ समझौता हुआ है, वह सम्मानजनक नहीं है। कांग्रेस को क्षेत्रीय दलों के सामने नतमस्तक होना पड़ा है। देखना है कि देश के मतदाता इस घोषणा पत्र के वादे को किस रूप में लेते हैं।