कैंसर एक जानलेवा बीमारी है जिसके आमतौर पर कई प्रकार देखने को मिलते हैं। इनमें से एक कोलोरेक्टल कैंसर है, जो दुनिया के लिए सिरदर्द बना हुआ है। दुनिया में हो रही कैंसर से जुड़ी मौतों में यह प्रकार मुख्य है। कोलोरेक्टल कैंसर को रोका जा सकता है। अगर बीमारी को जल्दी पकड़ लिया जाए तो इसका इलाज मुमकिन है। सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर इसे जल्दी पकड़ा कैसे जाए। इस बारे में इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी में सीनियर कंसल्टेंट व प्रमुख डॉ. दीपक गोविल और सीनियर कंसल्टेंट डॉ. विवेक टंडन से बात की गई।
कोलोरेक्टल कैंसर कोलन या मलाशय में विकसित होता है। ये डायजेस्टिव सिस्टम के हिस्से हैं जो भोजन को प्रोसेस करते हैं और वेस्ट मटेरियल को खत्म करते हैं। कोलोरेक्टल के अधिकतर विकृतियां प्री कैंसरस पॉलीप्स के रूप में शुरू होती हैं जिससे मलाशय की आंतरिक परत में असामान्य बढ़ोतरी होती हैं। यदि इन पॉलीप्स की तुरंत पहचान और रोकथाम नहीं की जाए तो कैंसर फैल सकता है। कोलन कैंसर को पकडऩे के लिए कुछ टेस्ट करवाने चाहिए। अगर आपको पेट का कोई रोग लंबे समय से हो रहा है और गंभीर होता जा रहा है तो इन टेस्ट को करवाएं। 45-50 की उम्र के बाद भी इन टेस्ट को करवाना चाहिए।
स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा काफी कम हो जाता है। प्रोसेस्ड और रेड मीट का सेवन सीमित करें और फल, सब्जी और साबुत अनाज से भरपूर बैलेंस्ड डाइट पर ज्यादा जोर दें। नियमित शारीरिक गतिविधि करने और अत्यधिक शराब के सेवन से बचने से भी जोखिम कम करने में मदद मिलती है।
वजन हेल्दी है या नहीं? : मोटापा से कोलन को काफी नुकसान पहुंचता है। इससे कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है। खुद का वजन कंट्रोल रखें। ऐसा करने से कैंसर का जोखिम कम किया जा सकता है और बेहतर जीवन जी सकते हैं।
तंबाकू से परहेज : तंबाकू को लंग और ओरल कैंसर का प्रमुख कारण माना गया है। लेकिन लोग नहीं जानते कि तंबाकू से कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा भी बढ़ता है। धूम्रपान छोडऩे से न केवल कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा कम होता है बल्कि कई अन्य स्वास्थ्य स्थितियों का खतरा भी कम कर सकते हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि कोलोरेक्टल कैंसर की रोकथाम के लिए इसे जल्दी पहचानना जरूरी है।