लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) तथा इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लुसिव (इंडी) गठबंधन के बीच शक्ति प्रदर्शन का दौर शुरू हो गया है। इसकी शुरुआत 31 मार्च को हुई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 31 मार्च को उत्तर प्रदेश के मेरठ में विशाल चुनावी सभा को संबोधित करते हुए विपक्ष पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि वर्तमान चुनाव राष्ट्रवादियों एवं परिवारवादियों के बीच है। मोदी ने कहा कि उनकी सरकार देश के भ्रष्टाचारियों को नहीं छोड़ेगी तथा उनसे लूटा हुआ पैसा देश को वापस दिलाएगी। यह लड़ाई भ्रष्टाचारियों को सजा दिलाने वाले लोगों तथा भ्रष्टाचारियों को बचाने वाले लोगों के बीच है। मेरठ की रैली से प्रधानमंत्री ने पूरे उत्तर प्रदेश को संदेश देने का प्रयास किया है कि उनका गठबंधन सभी को साथ लेकर चलने का पक्षधर है।
प्रधानमंत्री के चुनावी मंच पर अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल, सुहेल देव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओमप्रकाश राजभर, राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी तथा अपनी पार्टी की तरफ से संजय निषाद उपस्थित थे। मेरठ की रैली से प्रधानमंत्री ने किसानों एवं जाटों को साधने का प्रयास किया। साथ ही उन्होंने राजभर, कुर्मी, पटेल, निषाद आदि समुदाय के नेताओं के माध्यम से पूर्वी उत्तर प्रदेश को भी संदेश दिया। उत्तर प्रदेश में इन जातियों का अच्छा-खासा प्रभाव है जो भाजपा को चुनावी वैतरणी पार कराने में मदद करेगा।
पिछले लोकसभा चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा को मन माफिक सफलता नहीं मिली थी। लेकिन इस बार राष्ट्रीय लोकदल के साथ आने से भाजपा को मजबूती मिली है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच हुए चुनावी गठबंधन को देखते हुए भाजपा ने भी उत्तर प्रदेश में जातीय समीकरण को साधने का पूरा प्रयास किया है। बिखराव के दौर से गुजर रहा इंडी गठबंधन ने भी 31 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में चुनावी रैली आयोजित कर एकजुटता दिखाने का पूरा प्रयास किया।
रामलीला मैदान की रैली में लोकतंत्र बचाओ का नारा देकर विपक्षी दलों के नेताओं ने सत्तारूढ़ दल को संदेश देने की पूरी कोशिश की है। विपक्ष राजग के 400 पार तथा भाजपा के 370 पार के नारे को रोकने के लिए प्रयासरत है। दिल्ली की रैली में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरङ्क्षवद केजरीवाल तथा झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का मुद्दा छाया रहा। विपक्षी दल के नेताओं ने निर्वाचन आयोग से ईडी एवं सीबीआई तथा आयकर जैसी जांच एजेंसियों के दुरुपयोग को रोकने की मांग की। कई विपक्षी नेताओं ने कहा कि मोदी सरकार अपने राजनीतिक हित के लिए सीबीआई, ईडी एवं आईटी जैसी जांच एजेंसियों को विपक्षी नेताओं के खिलाफ लगा रही है। उनका यह भी आरोप था कि ये जांच एजेंसियां सत्ताधारी दल के नेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।
इस चुनावी रैली के आयोजन में आम आदमी पार्टी ने सक्रिय भूमिका निभाई थी, क्योंकि वर्तमान में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ईडी की गिरफ्त में हैं। जिस तरह विपक्षी पार्टी के नेता अपनी पार्टी को छोड़कर भाजपा का दामन थाम रहे हैं उससे इंडी गठबंधन का चिंतित होना स्वाभाविक है। कई राज्यों में तो इंडी गठबंधन की पार्टियां चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ खड़ी हैं। पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस तथा वामपंथी पार्टियों के खिलाफ चुनाव मैदान में उतर चुकी है। ऐसी स्थिति में पश्चिम बंगाल में इंडी गठबंधन पूरी तरह विफल हो गया है। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के भीतर ही टिकट के लिए घमासान मचा हुआ है। राष्ट्रीय लोकदल पहले से ही समाजवादी पार्टी का साथ छोड़ चुकी है।
बिहार में भी सीट बंटवारे को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) तथा कांग्रेस के बीच खींचतान जारी है। खासकर पूर्णिया सीट दोनों दलों के बीच प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ है। हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए पप्पू यादव पूर्णिया सीट लडऩे पर आमादा हैं, जबकि राजद ने पहले ही बीमा भारती को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। कुल मिलाकर इंडी गठबंधन के लिए आगे का रास्ता आसान नहीं है, क्योंकि उसको भाजपा की तरफ से कड़ी चुनौती मिल रही है।