जोरहाट : आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर जोरहाट सीट से दाखिल हुए पांच नामांकन पत्रों में से आज शनिवार को एक निर्दलीय प्रत्याशी द्वारा अपना नामांकन वापस लेने के बाद मैदान में अब कुल चार उम्मीदवार डटे हैं। नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही यह लगभग साफ हो गया है कि इस सीट से मुख्य मुकाबला भाजपा प्रत्याशी तपन कुमार गोगोई और कांग्रेस उम्मीदवार गौरव गोगोई के बीच तय है। गोगोई बनाम गोगोई वाली इस सीट पर कांटे का मुकाबला होने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि भाजपा अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है। तपन गोगोई के नामांकन जमा देने के दिन जोरहाट पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने यहां इतनी बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ देख तपन गोगोई की जीत पक्की बताई। मालूम हो कि तपन गोगोई की नामांकन प्रक्रिया में जहां राज्य के मुख्यमंत्री एवं कई कैबिनेट मंत्री उम्मीदवार गोगोई के साथ नजर आए थे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा था कि वर्ष 2001 से वे खुद कई बार नामांकन दाखिल करवा चुके हैं।

लेकिन प्रत्याशी के नामांकन जमा देने के दिन लोगों का ऐसा हुजूम उन्होंने पहले कभी नहीं देखा। मुख्यमंत्री की मानें तो तपन गोगोई के नामांकन जमा देने के दिन हुई भीड़ ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। इतना ही नहीं, भीड़ को देखने के बाद उन्हें यह विश्वास भी हो गया कि दो लाख मतों के अधिक अंतर से तपन गोगोई की जीत पक्की है। ऐसे में अब उन्हें तीन लाख मतों के बड़े अंतर से जीत दिलाने के लिए काम करना होगा। मुख्यमंत्री का अपने प्रत्याशी पर इतना भरोसा देख भाजपा कर्मियों की बांछे खिल गईं। वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की ओर से गौरव गोगोई ने अकेले ही अपना नामांकन दाखिल किया था। लेकिन नामांकन के दिन निकली गौरव गोगोई की शोभायात्रा के दौरान उमड़ी भीड़ को कमतर नहीं आंका जा सकता। अब बात अगर दोनों दलों के प्रचार अभियान की कि जाए तो भाजपा प्रत्याशी तपन कुमार गोगोई जहां वॉकर के साथ जोरहाट लोकसभा सीट के अधीन चार जिलों क्रमश: जोरहाट, शिवसागर, चराईदेव और माजुली की कुल दस विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार अभियान तेज कर दिया है। चुनाव प्रचार अभियान की गतिविधियों पर नजर डालें तो भाजपा संगठनात्मक स्तर पर अपने प्रतिद्वंदियों से काफी आगे दिख रही है।

चुनाव विश्लेषकों की मानें तो इन चुनावों में सत्तारूढ़ भाजपा गठबंधन की इस बार महिला तथा युवा मतदाताओं पर खास नजर है। राज्य में महिला मतदाताओं की संख्या एक करोड़ 21 लाख है, जो किसी भी चुनाव परिणाम पर निर्णायक भूमिका निभा सकती है। वहीं इस बार पहली बार मतदान करने के आधिकारिक मतदाताओं की संख्या सात लाख से ऊपर है, जबकि पुरुष मतदाताओं की संख्या 1 करोड़ 21 लाख 79 हजार है। वहीं गौरव गोगोई भी प्रचार में किसी से पीछे नहीं है। गत 27 मार्च को गौरव गोगोई का थीम सॉन्ग रिलीज होने के बाद कांग्रेस कर्मियों का जोश दुगना हो गया है। गौरव की चुनावी सभाओं में हर तरफ इस गाने की धुने सुनाई पड़ रही है। अपने दम पर प्रचार कर रहे तेजतर्रार नेता गौरव गोगोई को लोगों का पूर्ण समर्थन मिल रहा है। इधर कांग्रेस या अन्य दलों से भाजपा में शामिल होने वालों की संख्या में लगातार हो रहे इजाफे के चलते तपन गोगोई के समर्थकों की संख्या में कोई कमी नजर नहीं आ रही है।

अगर बात की जाए तो इस दस विधानसभा क्षेत्रों में सात विस क्षेत्रों पर भाजपा या अगप के विधायक है, जबकि कांग्रेस के पास तिताबर और नाजिरा विधानसभा सीट ही है। इसके अलावा शिवसागर विस क्षेत्र अखिल गोगोई के कब्जे में है, जिन्होंने खुलकर अपना समर्थन गौरव गोगोई को देने की बात कही थी। जानकारों के अनुसार विधानसभा सीटों के परिसीमन का असर आगामी लोकसभा चुनाव के समीकरणों पर पडऩा निश्चित है और राज्य की महत्वपूर्ण संसदीय सीट जोरहाट भी इसमें शामिल है। पिछले लोकसभा चुनावों तक माजुली विधानसभा सीट के मतदाता लखीमपुर संसदीय सीट के उम्मीदवार के लिए मतदान करते थे।

विश्व के सबसे बड़े नदी द्वीप एवं सत्रनगरी के रूप में परिचित माजुली को तत्कालीन मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल के मुख्यमंत्रित्व काल में आठ सितंबर 2016 में माजुली को जिले के रूप मान्यता दी गई। वहीं परिसीमन के बाद इस विधानसभा सीट को अब लखीमपुर संसदीय क्षेत्र की नौ विधानसभा सीटों में से अलग करते हुए जोरहाट संसदीय सीट का हिस्सा बनाए जाने के बाद जोरहाट, शिवसागर, चराईदेव के बाद माजुली जिला भी जोरहाट संसदीय सीट से जुड़ गया है।

किसी भी उम्मीदवार के लिए चुनाव में सफलता के लिए सबसे जरूरी है अपने मतदाताओं के साथ जनसंपर्क अभियान का होना और इस बार के चुनावों में जोरहाट संसदीय सीट के प्रत्येक प्रत्याशी को माजुली विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं के साथ जनसंपर्क अभियान चलाए जाने की रणनीति तय करनी होगी, यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। उल्लेखनीय है कि जोरहाट संसदीय सीट पर कुल 17,22,372 मतदाता है। अब यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का अनुपालन करते हुए प्रत्याशी अपने चुनाव प्रचार अभियान को विजयी रथ तक पहुंचाने में कितने सफल हो पाते हैं।