होली पर देशभर में रंगो से खेला जाता है। इस दिन अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग देवी-देवताओं की पूजा करने का विधान है। होलिका पूजन के लिए लोग पहले से तैयारियां करना शुरू कर देते हैं। हम अधिकतर लोगों को सफेद कपड़े में देखते हैं। क्या होली पर सफेद कपड़ा पहनना फैशन है या इसके पीछे कोई धार्मिक मान्यता है।
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, होली का त्योहार भाईचारे का प्रतीक है और सफेद कपड़ा शांति और अमन का। कहा जाता है कि होली के दिन आपसी मनमुटाव को भुला कर हमें एक-दूसरे से मिलना चाहिए। सफेद कपड़े से मानसिक रूप से व्यक्ति शांत और शुद्ध रहता है इसके अलावा वह सभी प्रकार की चिंता और भय से मुक्त रहता है। इस दिन शांत रहकर आप अपने दिन की नई शुरूआत कर सकते हैं।
क्या है धार्मिक महत्व : वेसै ज्योतिष कारण यह है कि होली के अवसर पर राहु देव का स्वभाव उग्र हो जाता है जिससे राहु के दुष्प्रभाव की वजह से इंसान बुरी संगत में पड़ जाता है। उस व्यक्ति में निगेटिव एनर्जी आ जाती है। इंसान की भाषा अत्यधिक कठोर हो जाती है और उसका पारिवारिक संबंध भी बिगड़ जाता है। इसलिए राहु के प्रकोप से बचने के लिए सफेद कपड़ा पहना जाता है। होली का त्योहार सनातन धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस दिन प्रदेश में रहने वाले लोग भी अपने घर होली का त्योहार मनाने के लिए अवश्य आते हैं। जिस प्रकार छठ पर्व बिहारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, उसी तरह से होली का भी त्योहार काफी विशेष महत्व रखता है। इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग और अबीर-गुलाल लगाकर दोस्ती और भाईचारे का परिचय देते हैं।