आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला पड़ोसी देश पाकिस्तान फिलहाल चारों तरफ से घिर गया है। जिस आतंकी संगठनों को पाल-पोष कर मजबूत किया अब वही आतंकी उसके लिए राहू-केतु बन गए हैं। अफगानिस्तान-पाकिस्तान का सीमावर्ती क्षेत्र युद्ध का मैदान बन गया है। पाकिस्तानी सेना तथा तालिबानी लड़ाकों के बीच लगातार झड़प हो रही है। दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। पाकिस्तानी सेना ने कुछ दिन पहले एयर स्ट्राइक कर तहरीक-ए-तालिबान-पाकिस्तान (टीटीपी) को सबक सिखाने का दावा किया था। बाद में पता चला कि पाकिस्तानी हमले में नागरिक मारे गए हैं, जबकि पाकिस्तान ने टीटीपी के कमांडर के मारे जाने का दावा किया था। तालिबान ने इस घटना के बाद जबर्दस्त हमला किया, जिसमें पाकिस्तानी सेना के दो अधिकारी समेत कुल सात फौजी मारे गए। कई चेक पोस्ट से तैनात पाकिस्तानी सेना के जवान फरार हो गए। अब तो सत्ताधारी तालिबान ने टीपीपी को खुलेआम समर्थन की घोषणा कर दी है।
आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ एवं राष्ट्रपति जरदारी के लिए अपनी प्रतिष्ठा बचाना मुश्किल हो रहा है। सबसे अधिक समस्या पाकिस्तानी सेना को हो रही है। यह समस्या केवल अफगानिस्तान की सीमा से ही नहीं हो रही है, बल्कि ईरान भी पाकिस्तान पर हमलावर है। ईरानी सेना ने दो बार पाकिस्तान की सीमा में घुसकर अपने यहां सक्रिय आतंकी समूहों के ठिकाने पर हमला किया। ईरान के हमले से पाकिस्तान बेनकाब हो गया है। बलूच लिबरेशन आर्मी ने भी पाकिस्तानी सेना की नाक में दम कर रखा है। दो दिन पहले ही बीएलए ने पाकिस्तान स्थित ग्वादर बंदरगाह पर हमला किया था। पाकिस्तानी सेना के हस्तक्षेप से कोई बड़ी घटना नहीं हुई, किंतु पाकिस्तान के आका चीन के लिए बड़े खतरे की घंटी है। ग्वादर बंदरगाह चीन के लिए महत्वपूर्ण परियोजना है जिसमें उसने काफी निवेश कर रखा है।
भारत और तालिबान के बढ़ते रिश्ते ने भी पाकिस्तान के लिए चिंता बढ़ा दी है। अब अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार ने पाकिस्तान से मुकाबला करने के लिए भारत से सैन्य साजो-सामान एवं समर्थन देने की अपील की है। अफगानिस्तान चाहता है कि भारत उसकी सेना को प्रशिक्षण एवं हथियार दे। भारत अफगानिस्तान को पहले से ही बड़े पैमाने पर मानवीय सहायता प्रदान कर रहा है। ईरान के साथ भी भारत के मजबूत संबंध हैं। भारत ईरान स्थित उसके चाबहार बंदरगाह को विकसित कर रहा है ताकि भारत को ग्वादर का विकल्प मिल सके।
चाबहार बंदरगाह से भारत अपना व्यापार मध्य-पूर्व एवं यूरोपीय देशों के साथ पाकिस्तानी क्षेत्र में गए बिना कर सकता है। अगर अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तान का तनाव बढ़ता है तो उसके लिए अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो जाएगी, क्योंकि वह अपने देश को बचाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष से सहायता देने का आग्रह कर रहा है। युद्ध की स्थिति में आॢथक व्यवस्था पर चोट लगेगी, जिसको संभालना मुश्किल हो जाएगा। अगर पाकिस्तान को अपने को बचाना है तो उसको भारत के साथ संबंधों में सुधार करना पड़ेगा। यह तभी संभव है जब कुटिल पाकिस्तान भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देना छोड़ दे।