आखिरकार व्लादिमीर पुतिन ने राष्ट्रपति पद का चुनाव जीत लिया है, उनकी जीत से जहां उनके समर्थक राष्ट्रों में खुशी की लहर है, वहीं पश्चिमी देशों को पुतिन की यह जीत पच नहीं रही है। उन्होंने रिकॉर्ड मत के साथ राष्ट्रपति पद का पांचवां कार्यकाल हासिल किया है। चुनाव में पुतिन की जीत देश की राजनीतिक व्यवस्था पर उनके नियंत्रण को रेखांकित करती है। उल्लेखनीय है कि पुतिन दिसंबर 1999 से राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री के तौर पर रूस का नेतृत्व कर रहे हैं। इससे पहले पुतिन ने नतीजों को उनमें लोगों का विश्वास और उम्मीद बताया, जबकि आलोचकों ने नतीजों को चुनाव की पूर्वनिर्धारित प्रकृृति का एक और प्रतिबिंब बताया। मतदान खत्म होने के बाद स्वयंसेवकों के साथ बातचीत करते हुए पुतिन ने कहा कि हमारे पास बहुत काम हैं, लेकिन मैं सबसे यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि जब हम एकजुट थे तो कोई भी हमें डराने, हमारी इच्छाशक्ति और हमारे आत्म-विवेक को दबाने में कामयाब नहीं हुआ। उल्लेखनीय है कि पुतिन ने 16 साल तक सोवियत संघ की गुप्तचर संस्था केजीबी में अधिकारी के रूप में सेवा की, जहां वे लेफ्टिनेंट कर्नल के पद तक पदोन्नत हुए। 1991 में सेवानिवृत्त होने के पश्चात उन्होंने अपने पैतृक शहर सेंट पीटर्सबर्ग से राजनीति में कदम रखा। 1996 में वह मास्को में राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन के प्रशासन में शामिल हो गए एवं येल्तसिन के अप्रत्याशित रूप से इस्तीफा दे देने के कारण 31 दिसंबर 1999 को रूस के कार्यवाहक राष्ट्रपति बने। तत्पश्चात पुतिन ने वर्ष 2000 और फिर 2004 का राष्ट्रपति चुनाव जीता। रूसी संविधान के द्वारा तय किए गए कार्यकाल सीमा की वजह से वह 2008 में लगातार तीसरी बार राष्ट्रपति पद के चुनाव में खड़े होने के लिए अयोग्य थे। 2008 में दिमित्री मेदवेदेव ने राष्ट्रपति चुनाव जीता और प्रधानमंत्री के रूप में पुतिन को नियुक्त किया। सितंबर 2011 में कानून में बदलाव के परिणामस्वरूप राष्ट्रपति पद के कार्यकाल की अवधि चार साल से बढ़ाकर छह साल हो गई एवं पुतिन ने 2012 में राष्ट्रपति पद के लिए एक तीसरे कार्यकाल की तलाश में चुनाव लड़ने की घोषणा की, जिसके चलते कई रूसी शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। मार्च 2012 में उन्होंने यह चुनाव जीता और एक बार फिर चुनाव में भारी जीत दर्ज की है। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के रूप में पुतिन के पहले कार्यकाल (1999-2008) के दौरान वास्तविक आय में 2.5 गुणा वृद्धि हुई, वास्तविक पारिश्रमिक में तीन गुणा से अधिक वृद्धि हुई, बेरोजगारी और गरीबी आधी से कम हो गई एवं रूसियों की ओर से आत्म-मूल्यांकित जीवन संतुष्टि में काफी बढ़ोतरी हुई। पुतिन के पहले राष्ट्रपति कार्यकाल को आर्थिक वृद्धि के दौर के रूप में देखा जाता है। पुतिन का जन्म 7 अक्तूबर 1952 को सोवियत संघ के रूसी गणराज्य के लेनिनग्राद (वर्तमान सेंट पीटर्सबर्ग, रूस) में हुआ था। उनके पिता का नाम व्लादिमीर स्पिरिदोनोविच पुतिन और माता का नाम मारिया इवानोव्ना शेलोमोवा था। उनकी माता एक कारखाने में काम करती थीं। उनके पिता 1930 के दशक में पनडुब्बी बेड़े में सेवा करते थे और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान शत्रु को घात लगाकर हमला करने वाले दस्ते में भर्ती हो गए। युद्ध के बाद उन्होंने एक कारखाने में फोरमैन के रूप में काम किया। व्लादीमिर अपने परिवार में तीसरे बच्चे थे और उनके दो बड़े भाइयों की बाल अवस्था में ही मृत्यु हो गई थी। सन् 1975 में पुतिन ने लेनिनग्राद राजकीय विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और फिर केजीबी में काम करना शुरू किया जिसे वह सन् 1991 तक करते रहे। सन् 1990 में पुतिन को लेनिनग्राद के मेयर अनातोली सब्चाक के सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया। उसके बाद वे देश के राष्ट्रपति के पद तक पहुंचे और इस बार के चुनाव ने साबित कर दिया है कि रूस में फिलहाल उनका कोई राजनीतिक विकल्प मौजूद नहीं है। पुतिन की जीत भारत की जीत है क्योंकि वह भारत के साथ अपनी मित्रता बखूबी निभा रहे हैं, जो कई दशकों से जारी है।
फिर जीते पुतिन
