भारतीय सनातन परम्परा के हिन्दू धर्मशास्ïत्रों में हर माह के विशिष्ट तिथि की विशेष महिमा है। द्वादश मास के समस्त तिथियों में एकादशी तिथि की अपनी खास पहचान है। फाल्गुन मास के शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि के दिन आमलकी/रंगभरी एकादशी मनाई जाती है। मान्यता है कि आमलकी एकादशी के व्रत से द्वादश मास के समस्त एकादशी के व्रत का पुण्य फल मिलता है, साथ ही जीवन के समस्त पापों का शमन भी होता है। एकादशी तिथि के दिन स्नान-दान व्रत से सहस्र गोदान के समान शुभफल की प्राप्ति बतलाई गई है। इस दिन स्नान-दान व व्रत से भगवान श्रीहरि यानि श्रीविष्णु जी की पूजा-अर्चना का विशेष महत्त्व है।
प्रख्यात ज्योतिषविद् विमल जैन ने बताया कि फाल्गुन शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि 19 मार्च, मंगलवार को अद्र्धरात्रि 12 बजकर 24 मिनट पर लग रही है जो 20 मार्च, बुधवार को अद्र्धरात्रि के पश्चात 2 बजकर 24 मिनट तक रहेगी। पुष्य नक्षत्र 19 मार्च, मंगलवार को रात्रि 8 बजकर 10 मिनट से 20 मार्च, बुधवार को रात्रि 10 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। 20 मार्च, बुधवार को उदया तिथि के रूप में एकादशी तिथि होने से आमलकी/रंगभरी एकादशी का व्रत इसी दिन रखा जाएगा। आज के दिन काशी में श्रीकाशी विश्वनाथ जी का प्रतिष्ठा महोत्सव व शृंगार दिवस भी मनाया जाता है।
रंगभरी एकादशी के दिन काशी में शिवजी के भक्त बहुत धूम-धाम इस त्योहार को मनाते हैं। इस दिन भोलेनाथ मां पार्वती का गौना कराकर काशी लाए थे। इसलिए इस दिन काशी में मां पार्वती का भव्य स्वागत किया जाता है, और इसी खुशी में रंग-गुलाल उड़ाने की परम्परा है। ऐसे करें भगवान श्रीहरि की पूजा—विमल जैन ने बताया कि व्रतकर्ता को अपने दैनिक नित्य कृत्यों से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्ïत्र धारण करके आमलकी/रंगभरी एकादशी व्रत का संकल्प लेना चाहिए। संकल्प के साथ व्रत करके समस्त नियम-संयम आदि का पालन करना चाहिए।
ऐसी धार्मिक मान्यता है कि आंवले के वृक्ष में त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश) का वास माना गया है। ब्रह्माजी वृक्ष के ऊपरी भाग में, शिवजी वृक्ष के मध्य भाग में एवं श्रीविष्णु वृक्ष के जड़ में निवास करते हैं। धार्मिक परम्परा के अनुसार आंवले के वृक्ष का पूजन पूर्वाभिमुख होकर करना चाहिए। साथ ही आंवले के वृक्ष के पूजन में पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित करने चाहिए। पूजन के पश्चात् वृक्ष की आरती करके परिक्रमा करना पुण्य फलदायी माना गया है। आंवले के फल का दान करना भी सौभाग्य में वृद्धि करता है।
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