नई दिल्ली : इस समय देशभर में नागरिकता कानून की चर्चा है। 11 मार्च से नागरिकता संशोधन अधिनियम यानी सीएएदेश में लागू हो चुका है। इसके लागू होते ही सियासत भी शुरू हो चुकी है। जहां विपक्षी दल कानून को संविधान के खिलाफ बता रहे हैं तो वहीं सत्ताधारी पार्टी इसे पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धर्म के आधार पर प्रताडि़त लोगों के लिए सम्मान बता रही है। सीएए लागू होने के बाद कानून से जुड़े कई सवाल भी हैं कि सीएए से किन लोगों को फायदा होगा? ऐसे कितने लोग देश में रह रहे हैं क्या इसका कोई आंकड़ा है? क्या सीएए से पहले भी लोगों को नागरिकता मिल रही है? क्या भारत के लोग भी तो दूसरे देशों की नागरिकता लेते हैं, इनकी संख्या कितनी है? आइये जानते हैं.नागरिकता संशोधन अधिनियम में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है। इसके लागू होने से इन तीन देशों के हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदायों से संबंधित अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता लेने में आसानी होगी। कानून कहता है कि इन देशों के ऐसे अल्पसंख्यक जो 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत में आए वो भारत की नागरिकता पाने के पात्र होंगे।

नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 पर संयुक्त समिति की रिपोर्ट में कहा गया था कि नए कानून से 31,313 लोगों को लाभ होगा। समिति को इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) ने बताया था कि उसके रिकॉर्ड के अनुसार, 25,447 हिन्दू, 5,807 सिख, 55 ईसाई, दो बौद्ध और दो पारसी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले 31,313 लोग इसके पात्र बनेंगे। इन लोगों को अपने संबंधित देशों में धार्मिक उत्पीड़न के दावे के आधार पर दीर्घकालिक वीजा दिया गया है और वे भारतीय नागरिकता चाहते हैं। इसलिए ये व्यक्ति तत्काल लाभार्थी होंगे। आईबी के मुताबिक, इस श्रेणी के तहत भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने के लिए अन्य लोगों को यह साबित करना होगा कि वे धार्मिक उत्पीडऩ के कारण भारत आए थे। यदि उन्होंने भारत आने के समय ऐसा घोषित नहीं किया होता, तो अब उनके लिए ऐसा दावा करना कठिन होता।

निर्णय लेने से पहले भविष्य के किसी भी दावे की जांच की जाएगी, जिसमें रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) भी शामिल है। संसद की संयुक्त समिति के इस सवाल के जवाब में आईबी निदेशक ने कहा था कि हां, क्योंकि उन्होंने दावा किया है; उन्होंने आवेदन किया है। ऐसे कई अन्य लोग होंगे जो आए होंगे और उन्होंने पहले ही विभिन्न तरीकों से नागरिकता ले ली होगी। उन्हें पासपोर्ट, राशन कार्ड मिल गया होगा। अन्य सभी दस्तावेज उन्होंने प्राप्त कर लिए होंगे और वे पहले ही मतदाता सूची में अपना पंजीकरण करा चुके होंगे। इसलिए वे पहले से ही इस देश के नागरिक हैं। यह जांचने के लिए न्यायाधिकरण पहले से ही मौजूद हैं कि क्या उनमें से किसी ने फर्जीवाड़े से नागरिकता ली है। यह कानून उन लोगों के लिए है जिन्होंने आवेदन किया है और जिन्होंने दावा किया है कि उनके संबंधित देश में उन पर अत्याचार किया है। जिन लोगों के पास सभी जरूरी दस्तावेज हैं, वो नागरिकता की शर्तों को पूरा करते हैं तो नेचुरलाइजेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें भारत की नागरिकता मिलती है। इसके लिए उन्हें कम से कम 14 साल का इंतजार करना पड़ता है। इसी के तहत कई लोगों को देश की नागरिकता मिली है। मशहूर गायक अदनान सामी इसका चर्चित उदाहरण हैं।