पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने शुक्रवार को श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र में आयोजित मिशन वसुंधरा 2.0 के समापन समारोह में भाग लिया। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद राज्य में भूमि प्रबंधन और भू-राजस्व प्रणाली में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने के लिए वसुंधरा 3.0 का शुभारंभ किया जाएगा। इसके अलावा, उन्होंने यह भी घोषणा की कि राज्य सरकार ने एसटी और एससी समुदायों की 100 प्रतिशत आबादी वाले राजस्व गांवों को आरक्षित करने का निर्णय लिया है। गौरतलब है कि 8 मई 2022 को शुरू किए गए मिशन वसुंधरा 1.0 ने लोगों को भूमि संबंधी 10 सेवाएं प्रदान की थी और इसके तहत आठ लाख भूमि संबंधी मामलों का निपटारा किया गया। दूसरी ओर 14 नवंबर, 2022 को शुरू किया गया मिशन वसुंधरा 2.0 का उद्देश्य राज्य के लोगों के भूमि अधिकारों की बंदोबस्ती की व्यवस्था करना था। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा ने कहा कि सत्ता में आने के बाद से वर्तमान सरकार भू-राजस्व सेवाओं को डिजिटल बनाने के साथ-साथ भू-राजस्व और भूमि अधिकार प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव लाने में लगातार लगी हुई है। उन्होंने कहा कि मिशन वसुंधरा 2.0, मुख्य रूप से स्थानीय लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए शुरू की गई थी और इसने स्थानीय लोगों में आशा की एक नई किरण जगाई।

उन्होंने कहा कि मिशन वसुंधरा 2.0 के तहत 13 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। मिशन वसुंधरा 2.0 में लोगों को ऑफर ऑफ सेटलमेंट दिया गया था जिनमें से 84 प्रतिशत एसटी, एससी, ओबीसी और एमओबीसी से थे। मिशन वसुंधरा 2.0 के तहत ब्रह्मपुत्र घाटी में 3 लाख बीघे से ज्यादा और बराक घाटी में 1 हजार बीघे से ज्यादा जमीन का बंदोबस्त किया गया। सीएम डॉ. शर्मा ने यह भी कहा कि मिशन वसुंधरा 3.0 के तहत राज्य में अगली पीढ़ी के कुछ सुधार लाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मिशन वसुंधरा 2.0 के हिस्से के रूप में राज्य में पिछली तीन पीढिय़ों से रह रहे लोगों को सेटलमेंट का प्रस्ताव या भूमि अधिकार देने पर विचार किया गया था जिसके परिणामस्वरूप चाय और आदिवासी समुदाय के लोगों को नुकसान उठाना पड़ा। मिशन वसुंधरा 3.0 में चाय और आदिवासी समुदाय के लोगों के लिए तीन पीढ़ी की परिभाषा से छूट दी जाएगी। गोरखा समुदाय के लोगों के लिए चाय और आदिवासी समुदाय जैसी ही व्यवस्था लागू होगी। इसी तरह, एसटी और एससी समुदाय के लोगों को भूमि अधिकार पाने के लिए तीन पीढिय़ों का प्रमाण पत्र जमा नहीं करना होगा। इसके अलावा, कुछ संगठन, सहकारी समितियां जो उचित अधिकार के बिना भूमि पर कब्जा कर रही हैं, उन्हें भी मिशन वसुंधरा 3.0 के तहत कुछ मानदंडों के साथ भूमि अधिकार दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि गुवाहाटी के सुनसाली इलाकों और डिब्रूगढ़ के टी गार्डन ग्रांट इलाकों में रहने वाले लोगों को मिशन वसुंधरा 3.0 के तहत भूमि पट्टों के लिए आवेदन करने का एक बार मौका दिया जाएगा।

उन्होंने आगे संबंधित अधिकारियों से एक्समाली पट्टा के प्रभागों को प्राथमिकता वाले क्षेत्र के रूप में लेने की अपील की। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य भर में भूमि-रिकॉर्ड प्रणाली को मजबूत करने के उद्देश्य से भू-स्थानिक मानचित्रों की डिजिटल डिलीवरी की सुविधा के लिए एक नई सेवा शुरू की जाएगी। राष्ट्रीय जेनेरिक दस्तावेज पंजीकरण प्रणाली (एनजीडीआरएस) का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा ने कहा कि परियोजनाएं वर्तमान में कामरूप और दरंग जिलों में उप रजिस्ट्रार के छह कार्यालयों में कार्यान्वित की जा रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि जल्द ही भू-राजस्व वसूली अभियान शुरू किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को भूमि बिक्री अनुमति के आवेदनों का अविलंब निपटारा करने को कहा। माजुली, बरपेटा, नारायणपुर और बटद्रवा के क्षेत्रों को संरक्षित बेल्ट और ब्लॉक घोषित करने के सरकार के प्रयास का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने 100 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति की आबादी वाले गांवों को समान श्रेणी के तहत लाने के वर्तमान शासन के इरादे के बारे में बात की।

अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि मिशन वसुंधरा 4.0 के तहत चर क्षेत्रों के भीतर की भूमि का सर्वेक्षण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले 5 वर्षों में एक आधुनिक भूमि राजस्व प्रणाली स्थापित करने का लक्ष्य है। उन्होंने जिला आयुक्तों से अपील की कि वे भूमि से संबंधित सेवाओं के त्वरित और समयबद्ध निपटान के लिए अपने संबंधित कार्यालयों में कम से कम 10-12 ग्रेड-3 कर्मचारियों को भूमि से संबंधित मामलों में प्रशिक्षित करने के लिए कदम उठाएं। समारोह को राजस्व मंत्री जोगेन मोहन ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में मुख्य सचिव पवन कुमार बरठाकुर, अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह एवं राजनीतिक अविनाश जोशी, प्रधान सचिव राजस्व जीडी त्रिपाठी भी उपस्थित थे।