डिजिटल डेस्क : कांग्रेस नेता जया ठाकुर, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और एनजीओ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स समेत चार लोगों द्वारा इलेक्टोरल बॉन्ड पर दाखिल की गई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया है । न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने इस मामले में की है चुनवाई।
इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को रद्द करते हुए सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि, चुनावी बॉन्ड असंवैधानिक है। यह योजना अनुच्छेद 19(1)(ए) का उल्लंघन है। सरकार से पूछना जनता का कर्तव्य है । कोर्ट ने आगे कहा की स्टेट बैंक ऑफ इंडिया साल 2023 के अप्रैल महीने से लेकर अब तक की सारी जानकारियां चुनाव आयोग को दे और आयोग ये जानकारी कोर्ट को दे । साथ ही कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश देते हुए कहा की वह 13 अप्रैल तक अपनी वेबसाइट जानकारी साझा करे ।
चुनावी बॉन्ड एक वचन पत्र की तरह होता है, यह राजनीतिक दलों को चंदा देने का एक वित्तीय जरिया है। चुनावी बॉन्ड के लेनदेन में पार्टियों के बारे में कोई जानकारी नहीं होती है। भारत सरकार ने चुनावी बॉन्ड योजना की घोषणा 2017 में की थी। इस योजना को सरकार ने 29 जनवरी 2018 को कानूनन लागू कर दिया था। चुनावी बॉन्ड को भारत का कोई भी नागरिक या कंपनी भारतीय स्टेट बैंक की चुनिंदा शाखाओं से खरीद सकता है और अपनी पसंद के किसी भी राजनीतिक दल को गुमनाम तरीके से दान कर सकता है। चुनावी बॉन्ड पूरी तरह से गोपनीय होता है। इसकी जानकारी केवल स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को ही होती है।