बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा पाला बदलने के बाद लगभग दो सप्ताह तक बिहार में राजनीतिक सरगर्मी चरम पर थी। विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल द्वारा खेला होगा  के बयान के बाद ऐसा लग रहा था कि नीतीश सरकार को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करने के लिए कठिन चुनौती से गुजरना पड़ेगा। दोनों पक्षों द्वारा अपने पाले में विधायकों को रखने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाए गए। जहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के आठ विधायक फ्लोर टेस्ट से पहले गायब हो गए थे, वहीं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के तीन विधायक भी अपना खेमा छोड़ चुके थे। एक तरफ तेजस्वी यादव खेला करने के लिए सक्रिय थे वहीं गृह मंत्री अमित शाह एवं गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय अपने पाले के विधायकों को बांधने के साथ-साथ राजद के तीन विधायकों को अपने पाले में खींचने में सफल हो गए। हम पार्टी के सुप्रीमो जीतन राम माझी ने भी फ्लोर टेस्ट से पहले रूठने का नाटक किया था, किंतु अंत में वो भी मान गए। विधानसभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी को हटाने के लिए लाये गए अविश्वास प्रस्ताव पर सत्ता पक्ष की जीत के बाद ऐसा लगने लगा कि नीतीश सरकार विधानसभा में बहुमत साबित कर देगी। अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे पर तीखे हमले किये गए। बहुमत साबित करने के लिए अमित शाह को मैदान में उतरना पड़ा था। अगर वे मैदान में नहीं आते तो नीतीश सरकार को बहुमत साबित करना मुश्किल होता। नीतीश कुमार को राष्ट्रीय जनता दल के साथ काम करने में परेशानी हो रही थी, क्योंकि लालू प्रसाद यादव का हस्तक्षेप बढ़ गया था। नीतीश कुमार ने सदन के भीतर तथा बाहर यह स्वीकार किया है कि उनको काम करने में परेशानी हो रही थी। बिहार के बजट सत्र में पक्ष-विपक्ष के बीच चल रहा टकराव सामने आ रहा है। भाजपा गृह मंत्रालय चाहती थी, किंतु नीतीश कुमार ने इस मामले में कोई समझौता नहीं किया। इस बार भाजपा अलग एजेंडे पर काम कर रही है। बिहार की 40 लोकसभा सीट पर जीत सुनिश्चित करने के लिए नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल-यू के साथ तालमेल किया गया है। पहले से ही लोक जन शक्ति पार्टी के दोनों धड़े, हम तथा उपेन्द्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी भाजपा के साथ है। मोदी सरकार ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं जननायक स्व. कर्पूरी ठाकुर को मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ देकर बिहार के अति पिछड़े एवं गरीब वर्ग को साधने का प्रयास किया है। नन्द किशोर यादव को विधानसभा अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने यादव मतदाताओं को भी अपनी तरफ खींचने का प्रयास किया है। बहुमत साबित हो जाने के बाद अब नीतीश सरकार को काम करना पड़ेगा। पग-पग पर सरकार को मजबूत विपक्षी दल राजद से लोहा लेना पड़ेगा। इस बार भाजपा ने अपने ऐसे दो नेताओं को उप-मुख्यमंत्री बनाया है जो नीतीश कुमार के कट्टर आलोचक रहे हैं। नीतीश कुमार चाहते थे कि सुशील मोदी को उप-मुख्यमंत्री बनाया जाए, किंतु पार्टी हाई कमान ने सम्राट चौधरी एवं विजय सिन्हा जैसे तेज-तर्रार नेताओं को उप-मुख्यमंत्री बनाकर अपना इरादा स्पष्ट कर दिया है। इसका मतलब साफ है कि नीतीश कुमार को राजग में वैसी तरजीह नहीं मिलेगी जैसी पहले मिलती थी। जनता दल-यू के राजग में आने के बाद लोकसभा चुनाव के लिए सीटों के तालमेल को लेकर खींचतान बढ़ेगी। लोजपा के दोनों धड़ों के बीच हाजीपुर संसदीय क्षेत्र को लेकर पहले से ही तलवार खींची हुई है। ऐसा लगता है कि इस बार जनता दल-यू को वर्ष 2019 के मुकाबले कम सीटों पर ही समझौता करना पड़ेगा। नीतीश कुमार के राजग के साथ आने से इंडिया गठबंधन को करारा झटका लगा है, क्योंकि उन्होंने ही इंडिया गठबंधन के लिए पहल शुरू की थी। हालांकि गठबंधन का नाम इंडिया रखने के वे खिलाफ थे। बाद की बैठकों में हो रही उपेक्षा के कारण नीतीश कुमार नाराज चल रहे थे। अब उनके सामने अपनी पुरानी छवि बहाल करने की चुनौती होगी। देखना है कि भाजपा उनके कामकाज में कितना सहयोग करती है?