पूर्वाचल प्रहरी कार्यालय संवाददाता गुवाहाटीः मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने बृहस्पतिवार को बसुंधरा योजना के जरिए असम के लोगों को मियादी पट्टा देने के मुद्दे पर राज्य सरकार की नीति को साफ करते हुए कहा कि यह योजना असम के आम लोगों के लिए अभी नहीं है। इस योजना के तहत सिर्फ असम के उन मूल निवासियों को माटी का पट्टा दिया जाएगा जो असम में हजारों वर्षों से रह रहे हैं, लेकिन आज तक पूर्ववर्ती सरकारों ने उन्हें माटी का अधिकार नहीं दिया। असम सरकार बसंुधरा योजना -दो के तहत सिर्फ मटक, मोरान, चुतिया सहित एससी, एसटी और राज्य के ओबीसी लोगों को ही भूमि पट्टा प्रदान कर उन्हें जमीन का संपूर्ण अधिकार देने की योजना बनाई है और उसी के तहत पट्टा दिया गया है। असम विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विपक्षी दलों की ओर से लाए गए कटौती प्रस्ताव के दौरान पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने बसंुधरा योजना-दो के तहत माटी का पट्टा देने के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। विपक्ष के नेताओं ने सदन में राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि एक विशेष समुदाय को माटी का पट्टा नहीं दिया जा रहा है। उनके साथ भेद-भाव कर उनका कागज रद्द किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने विपक्षी नेताओं द्वारा इस योजना के बारे विभिन्न तरह के आरोपो को सिरे खारिज करते हुए सदन में साफ शब्दों में कहा कि हजारों वर्षों से रहने वाले खिलंजिया लोगों को जमीन के अधिकार से वंचित रखा गया, लेकिन भाजपानीत गठबंधन की सरकार ने यह फैसला किया कि इस बार राज्य में रहने वाले सभी मटक, मोरान,चुतिया सहित एससी, एसटी और ओबीसी लोगों को पट्टा प्रदान कर उन्हें जमीन का अधिक देंगे। उन्होंने कहा कि बीटीआर हो या राज्य के किसी कोने में इन समुदायों के लोगों के लोगों को पट्टा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ.शर्मा ने कहा कि आगामी 16 फरवरी से राज्य के जोनाई जिले इस अभियान के तहत पट्टा वितरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बसुंधरा-दो के तहत 13 लाख से अधिक लोगों ने पट्टा के लिए आवेदन दिया था, लेकिन उसमें दो लाख से अधिक खिलंजिया लोगों को ही पट्टा दिया गया और आगे भी उन्हीं लोगों को दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इस योजना के नियमों को उल्लेख करते हुए कहा कि पट्टा उन्हीं लोगों को दिया जाएगा जो खिलंजिया है, भूमिहीन हैं और गरीब हैं। उन्होंने आम लोगों को भरोसा देते हुए कहा कि बसुंधरा योजना आगे भी चलती रहेगी और इस नियम के तहत आम लोगों को बाद में पट्टा देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। चर इलाके की हजारों बीघा जमीन के बारे में उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक-एक मातब्बर (माटी के बड़े दलाल) द्वारा हजारों बीघा जमीन कब्जा कर रखा गया है। सरकार ऐसे लोगों को जल्द बुलाकर उस जमीन को सरकार अपने अंदर करने की योजना बनाने पर विचार कर रही है ताकि उन तमाम जमीनों पर सरकारी योजनाओं को अमली जामा पहनाने के साथ ही गरीबों को वहां बसाया जा सके। उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि पूर्व की सरकारों ने गरीबों से वोट तो लिया, लेकिन भूमि संस्कार के क्षेत्र में कोई काम नहीं किया, जिसके कारण आज इतनी समस्या पैदा हो रही है। उन्होंने सदन को विश्वास दिलाते हुए कहा कि यह जटिल काम को विभागीय मंत्री ने किया है और असम में भूमि सुधार के क्षेत्र में बड़ी क्रांति शुरू हो गई है। उन्होंने संरक्षित जमीन को दखल करने वाले लोगों को संदेश देते हुए कहा कि उन्हें फिलहाल पट्टा नहीं दिया जाएगा। हालांकि उन्होंने कहा कि वीजीआर और पीजीआर वाली जमीन को बाद इस योजना के तहत लाने पर विचार करेगी। मुख्यमंत्री ने खिलंजिया का उल्लेख करते हुए कहा कि असम में खिलंजिया वहीं जो हजारों वर्षों से यहां रह रहा है। मैं खुद कन्नौज से आया हूं। मैं यहां का नागरिक हो सकता हूं, लेकिन खिलंजिया कभी नहीं हो सकता, वहीं विभाग मंत्री जोगेन मोहने भी इस दौरान विपक्षी दलों के विधायकों का जवाब दिया।
सिर्फ मूल निवासियों को ही मिलेगा भूमि का पट्टा