चंद्रमा की परिक्रमा करने वाले नासा के एक अंतरिक्ष यान ने जापानी स्पेस एजेंसी (जाक्सा) के स्मार्ट लैंडर फॉर इन्वेस्टिगेटिंग मून या स्लीम को देखा है। पिछले सप्ताह यह चंद्रमा पर उतरा है, लेकिन इसकी लैंडिंग पूरी तरह सफल नहीं हो सकी। स्लिम के छोटे रोवर्स एलईवी-2 में से एक की ओर से पहले ही लैंडर की अधिक करीब से तस्वीर ली गई थी। इसमें दिख रहा था कि लैंडर उल्टा उतरा है। अब नासा की सैटेलाइट तस्वीर से पता चला है कि उतरते समय इंजन का एक नोजल गिर गया था। स्लीम ने 20 जनवरी 2024 को चांद पर लैंडिंग की थी। लेकिन यह उल्टा उतरा। इसका नतीजा ये हुआ कि लैंडर का सोलर सेल सूर्य की दिशा में नहीं रहा। इस कारण यह बिजली बनाने में नाकाम रहा। जाक्सा को अभी उम्मीद है कि सूर्य का कोण बदलने के बाद यह रिचार्ज शुरू हो जाएगा। हालांकि स्पेसक्राफ्ट रिजर्व बैटरी के जरिए लगभग ढाई घंटे तक चला।
स्लीम के कैमरों के साथ-साथ दो रोवर्स में से एक से तस्वीरें मिली हैं। रोवर स्लिम के चांद पर उतरने से ठीक पहले बाहर निकला था। चांद पर पहुंचाया गया जापान का एलईवी-2 अब तक का सबसे अनोखा रोवर है। यह एक गेंद की तरह है, जो जमीन पर गिरते ही खुल जाता है। जापानी खिलौना कंपनी टकारा टोमी की ओर से इसे बनाया गया है। इस रोवर ने जापान के लैंडर की फोटो जारी की है। इसमें स्लीम को चंद्रमा की सतह में दबी हुई नाक के साथ देखा जा सकता है। स्लीम का प्रबंधन करने वाले जाक्सा के इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एंड एस्ट्रोनॉटिकल साइंस (आईएसएएस) ने 25 जनवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि स्लीम के दो इंजनों में से एक 50 मीटर की ऊंचाई पर फेल हो गया। जानकारी के मुताबिक इंजन ने न सिर्फ काम करना बंद किया, बल्कि नोजल भी गिर गया।
एलईवी-2 की ओर से खींची गई तस्वीरों में इंजन का एन नोजल ऊपर की ओर दिख रहा है। गिरते हुए नोजल को स्लिम के नेविगेशन कैमरे ने देखा था। हालांकि इसके बावजूद भी लैंडर 100 मीटर के एरिया में सफल लैंडिंग में कामयाब रहा। इस बीच नासा के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर (एलआरओ) ने स्लीम को चांद की सतह पर देखा है। 23 जून 2009 को चंद्रमा की कक्षा में पहुंचने के बाद एलआरओ इसकी सतह की मैपिंग कर रहा है।