आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा को सीधी टक्कर देने के लिए इंडिया अलायंस जोर लगा रही है, लेकिन सीट बंटवारे को लेकर अभी भी पेंच फंसा हुआ है। अलायंस की कुल पांच बैठकें हो चुकी हैं, किंतु अभी तक ठोस निर्णय नहीं लिया जा सका है। कांग्रेस के वार्ताकारों ने आम आदमी पार्टी सहित कुछ दलों के साथ बातचीत की है। पंजाब तथा दिल्ली में आम आदमी पार्टी कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे को लेकर लचीला रुख अपनाने को तैयार है, किंतु उसे गुजरात एवं हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में कांग्रेस से कुछ सीटें चाहिए। यही कारण है कि इन दोनों पार्टीयों के बीच कोई आम सहमति नहीं बन पायी है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी कांग्रेस को केवल दो से तीन सीट तक देने को तैयार है, जबकि कांग्रेस को कम से कम आठ सीट चाहिए। तृणमूल कांग्रेस वामपंथी पार्टीयों को कुछ भी देने को तैयार नहीं है। पिछली बैठक में ममता ने अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम का बहाना बनाकर इंडिया अलायंस की मीटिंग से दूरी बना ली थी। बिहार में भी मामला पूरी तरह फंसा हुआ है। जनता दल-यू तथा राष्ट्रीय जनता दल (राजद) 17-17 सीटों पर प्रतिद्वंद्विता करना चाहती है। बाकी छह सीटों में से चार कांग्रेस को तथा दो वामपंथी दलों को देना चाहती है।

कांग्रेस ज्यादा सीटों की मांग कर रही है। जदयू बिहार में जल्द से जल्द सीट बंटवारे को अंतिम रूप देना चाहती है, ताकि वह अपने उम्मीदवारों की सूची पर अंतिम मुहर लगा सके। राजद के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव कांग्रेस तथा वामपंथी दलों को संतुष्ट कर अलायंस बचाने की हरसंभव कोशिश में लगे हुए हैं। पिछले कुछ दिनों से नीतीश कुमार का रवैया बदला-बदला नजर आ रहा है। नीतीश ने संयोजक पद के प्रस्ताव को भी ठुकरा कर अपना संकेत दे दिया है। शुरुआती दौर में जिस तरह नीतीश की उपेक्षा की गई उससे उनकी पार्टी में भी नाराजगी है। उत्तर प्रदेश जहां 80 लोकसभा की सीट है, वहां भी अभी तक तस्वीर साफ नहीं हो सकी है। समाजवादी पार्टी (सपा) एवं कांग्रेस के बीच पेंच फंसा हुआ है। अखिलेश यादव कांग्रेस को ज्यादा सीट देने को तैयार नहीं है, जबकि कांग्रेस 10-12 सीट की मांग कर रही है। पांच राज्यों के हुए विधानसभा चुनाव के वक्त कांग्रेस तथा सपा के बीच जो मनमुटाव हुआ था उसका असर अब भी दिखाई दे रहा है।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के अकेले मैदान में उतरने की घोषणा ने भी विपक्षी गठबंधन की तमाम रणनीति को उलटफेर कर दिया है। अगर मायावती उत्तर प्रदेश में अपने उम्मीदवार उतारती है तो इसका खामियाजा इंडिया अलायंस को निश्चित रूप से भुगतना पड़ेगा। राजस्थान, मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के फीके प्रदर्शन ने भी विपक्षी गठबंधन को मायूस किया है। कुल मिलाकर ऐसा लग रहा है कि इस महीने के अंत तक सीट बंटवारे का मामला शायद सुलझ नहीं पाए।