पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : केंद्र ने अल्फा के वार्ता समर्थक गुट के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन परेश बरुवा के नेतृत्व वाले अल्फा (आई) अभी भी एक संप्रभु असम की अपनी मांग पर अटल है। रविवार अपराह्न को म्यामां में परेश बरुवा के नेतृत्व वाले अल्फा (आई) के एक शिविर पर ड्रोन हमले की खबर सामने आई है। हालांकि, न तो सरकार और न ही सेना ने इस घटना पर कोई टिप्पणी की है, लेकिन अल्फा (आई) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर दावा किया कि भारतीय सेना ने रविवार अपराह्न म्यामां में समूह के शिविर पर ड्रोन हमला किया। बयान के अनुसार पहला हमला शाम 4:10 बजे, दूसरा 4:12 बजे और तीसरा 4:20 बजे हुआ। हालांकि, तीसरा हमला कथित तौर पर विफल रहा। खबर के मुताबिक इस ड्रोन हमले में दो अल्फा (आई) कैडर मामूली रूप से घायल हो गए हैं।
अल्फा (आई) के प्रचार विभाग के सदस्य कैप्टन रुमेल असम ने सोमवार को एक बयान में कहा कि 7 जनवरी 2024 को औपनिवेशिक भारत के कब्जे वाले बलों ने म्यामां में यूनाइटेड लिबरेशन फोर्सेज ऑफ असम (अल्फा) के एक मोबाइल शिविर पर ड्रोन से तीन बम विस्फोट किए। पहला हमला शाम 4:10 बजे, दूसरा 4:12 बजे और तीसरा 4:20 बजे हुआ। लेकिन तीसरे में विस्फोट नहीं हुआ जबकि अन्य दो हमलों में हमारे संगठन के दो सदस्य मामूली रूप से घायल हो गए। यदि औपनिवेशिक भारत राष्ट्र यह सोचता है कि वह इस तरह के सैन्य अभियानों से यूनाइटेड लिबरेशन फोर्सेज, असम (अल्फा) के नेताओं, अधिकारियों और सदस्यों को अपने लक्ष्यों और आदर्शों से विचलित कर सकता है, तो यह उनकी निरी कल्पना है। यूनाइटेड लिबरेशन फोर्सेस, असम (अल्फा) संगठन एक बहती हुई धारा है और तब तक बहती रहेगी जब तक यह अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच जाती।
यहां उल्लेखनीय है कि एक स्वतंत्र, संप्रभु असम की मांग को अतीत में छोड़, असम के सबसे बड़े सशस्त्र समूह, अल्फा के वार्ता समर्थक समूह ने मामूली आर्थिक पैकेज और विकास कार्यों के सरकारी वादों पर सहमति व्यक्त करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों के साथ एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए। 44 साल के खूनी संघर्ष के अंत में भारत सरकार के साथ हुए समझौते से वास्तव में क्या हासिल हुआ यह सवाल विभिन्न स्तरों पर उठाया गया है। लेकिन सशस्त्र विद्रोह की प्रतिज्ञा और स्वतंत्र और संप्रभु असम की अपनी मांग पर अटल तथा सरकार की पहुंच से काफी दूर अल्फा (आई) का नेतृत्व कर रहे परेश बरुवा के बिना इस समझौते की सार्थकता पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसी भी अफवाहें हैं कि म्यामां में अल्फा (आई) शिविर पर ड्रोन हमला परेश बरुवा को वश में करने की सरकार की योजना का हिस्सा है।