बचपन से हम अकसर सुनते आ रहे हैं कि मनुष्य के जीवन में सब दिन एक जैसे नहीं होते,उसमें बदलाव स्वाभाविक प्रक्रिया है। लगता है कि फिलहाल म्यामां की जुंटा सरकार पर यह कहावत फिट बैठती है। खबर है कि देश के कई भागों में वर्तमान सरकार के खिलाफ आंदोलन चल रहा है। अपने विरोधियों के खिलाफ सदैव कठोर रहने वाली सरकार फिलहाल नरम दिख रही है और बड़ी संख्या में जेलों से लोगों को रिहा किया गया है। उल्लेखनीय है कि म्यामां में फरवरी 2021 में सैन्य तख्तापलट के बाद आंग सान सू ची की चुनी हुई सरकार को गिराने के बाद आपातकाल घोषित कर दिया गया था। इस दौरान हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसी बीच बृहस्पतिवार को म्यामां की सैन्य प्रशासन परिषद ने ऐलान किया कि वह देश की स्वतंत्रता की 76वीं वर्षगांठ के मौके पर नौ हजार से अधिक कैदियों को रिहा कर रही है। सैन्य जुंटा ने यह घोषणा ऐसे समय पर की है जब उसे देश के उत्तर में विद्रोही समूहों के बढ़ते प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है।
विश्लेषकों के मुताबिक जातीय सशस्त्र समूहों के एक गठबंधन ने कहा है कि उसने चीन के साथ व्यापार के लिए महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों और बॉर्डर केंद्रों पर कब्जा कर लिया है। विश्लेषक इसे सैन्य जुंटा के लिए एक गंभीर खतरा बताते हैं। म्यामां में हर साल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राजधानी नेपिदॉ में एक सैन्य परेड का आयोजन होता है और उसके बाद जुंटा प्रमुख जनरल मिन ऑन्ग लैंग का संबोधन होता है, लेकिन इस बार जुंटा प्रमुख इस मौके पर गैरहाजिर रहे और उनकी जगह एक जूनियर ने पहले से तैयार भाषण पढ़ा। म्यामां की राज्य प्रशासन परिषद ने कहा कि लोगों की शांति और मानवीय आधार पर म्यामां के 9,652 और अन्य देशों के 114 कैदियों की सजा माफ कर दी गई। पिछले साल देश के स्वतंत्रता दिवस की 75वीं वर्षगांठ पर 7,012 कैदियों को माफी दी गई थी। गुरुवार को यंगून में रिहाई पाने वाले कैदियों के परिवार के कई सदस्य जेल के बाहर मौजूद थे और वे उनकी रिहाई को लेकर भावुक नजर आए।
कैदियों को बसों के जरिए जेलों से बाहर लाया गया और उन्होंने अपने रिश्तेदारों की ओर हाथ हिलाकर खुशी का इजहार किया। हालांकि, इस बात का फौरन कोई संकेत नहीं मिला कि रिहा होने वालों में राजनीतिक बंदी भी शामिल हैं। साल 2022 में म्यामां की एक अदालत ने सैन्य तख्तापलट का विरोध करने वाले चार कार्यकर्ताओं को फांसी की सजा दी थी। उस वक्त कहा गया था कि इन चारों को आतंकवाद के तहत हिंसक और अमानवीय हत्याएं करने के लिए सजा दी गई। म्यामां में तख्तापलट कर सत्ता हथिया लेने के बाद से ही सैन्य सरकार पर लोकतंत्र समर्थकों का दमन करने के आरोप लगते रहे हैं। देश में जारी लड़ाई और आर्थिक बदहाली की वजह से हिंसा, विस्थापन और गरीबी में तीव्र उछाल आया है। अप्रैल 2023 में विश्व बैंक के डाटा के मुताबिक करीब 40 फीसदी आबादी गरीबी रेखा से नीचे बसर कर रही है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि आने वाले समय में म्यामां की सत्ता में बदलाव संभव है।
अब देखना है कि यह कब संभव हो पाता है, 2024 म्यामां के लिए बदलाव लेकर आया है, इसमें कोई संदेह नहीं है, परंतु यह बदलाव एक बार फिर आंग सांग सूची को फिर से सत्ता में वापस ला पाएगा, इसकी संभावना बहुत ही कम है। कारण कि इस बार देश में एक नया नेतृत्व उभर रहा है,जो जुंटा सरकार को हटाने के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है और उसे आम लोगों का समर्थन भी मिल रहा है। अब देखना है कि म्यामां की राजनीति आगे कैसे बढ़ती है। फिलहाल लग रहा है कि सैन्य शासन अब ज्यादा दिनों तक लोगों के लोकतांत्रिक हकों को दबाकर नहीं रख पाएगा, कारण कि अब पब्लिक पूरी तरह जाग चुकी है और स्वतंत्रता के प्रति कोई भी जागरुकता बेकार नहीं जाती है।