नई दिल्ली : भारत-म्यामां सीमा के आसपास रह रहे लोगों को एक-दूसरे देश में बिना वीजा के 16 किलोमीटर तक जाने की अनुमति देने वाली मुक्त आवाजाही व्यवस्था (फ्री मूवमेंट रिजीम- एफएमआर) शीघ्र ही खत्म हो जाएगी। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। मिजोरम, मणिपुर, नगालैंड और अरूणाचल प्रदेश से गुजरने वाली 1,643 किलोमीटर लंबी भारत-म्यामां सीमा पर फिलहाल एफएमआर है। इसे भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ के तहत 2018 में लागू किया गया था। एफएमआर के तहत पर्वतीय जनजाति का हर सदस्य, जो भारत या म्यामां का नागरिक है एवं सीमा के किसी भी ओर 16 किलोमीटर के दायरे में रहता है, बॉर्डर पास दिखाने पर सीमा के आर-पार जा सकता है और दो सप्ताह तक वहां ठहर सकता है।
इस बॉर्डर पास की वैधता साल भर की होती है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हम शीघ्र ही भारत-म्यामां सीमा पर एफएमआर खत्म करने जा रहे हैं। हम पूरी सीमा पर बाड़ लगाने जा रहे हैं। अगले साढ़े चार साल में बाड़ लगाने का काम पूरा हो जाएगा। सीमापार से आने वाले किसी भी व्यक्ति को इसके लिए वीजा लेना होगा। इस विचार का मकसद न केवल एफएमआर का दुरूपयोग रोकना है, बल्कि अवैध प्रवासियों की घुसपैठ पर पूर्ण विराम लगाना तथा मादक पदार्थों एवं सोने की तस्करी करने वाले नेटवर्क को बिल्कुल पंगु बनाना है।
दरअसल, फिलहाल उग्रवादी संगठन एफएमआर का इस्तेमाल कर भारतीय भूमि में हमला करते हैं और फिर म्यामां भाग जाते हैं। यहां यह जिक्र करना प्रासंगिक होगा कि मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह ने सितंबर, 2023 में केंद्र से एफएमआर खत्म करने की अपील की थी। राज्य सरकार ने दलील दी है कि उग्रवादी अपनी गतिविधियां चलाने के लिए इस व्यवस्था का इस्तेमाल करते हैं। म्यामां में एक फरवरी, 2021 में सैन्य तख्तापलट के बाद से हजारों जुंटा विरोधी विद्राही मिजोरम में आ गए।