नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने इस वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। वहीं दूसरी तरफ इंडिया गठबंधन के घटक दलों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर पेंच फंसा हुआ है। नई दिल्ली में इंडिया गठबंधन के नेताओं की हुई बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई थी तथा सीट बंटवारे के मामले को जनवरी के दूसरे सप्ताह तक हल करने पर जोर दिया गया था। सभी नेताओं ने एक स्वर से कहा था कि सीट बंटवारे को लेकर कोई समस्या पैदा नहीं होगी। कांग्रेस चाहती है कि वह लगभग 300 सीटों पर चुनाव लड़े, जबकि सहयोगी दल के नेता कांग्रेस से बड़ा दिल दिखाने का अनुरोध कर रहे हैं। इसका मतलब साफ है कि कांग्रेस को अगर गठबंधन बचाना है तो उसे राजनीतिक बलिदान देने को तैयार रहना पड़ेगा। कांग्रेस ने सीट बंटवारे को लेकर मुकुल वासनिक की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति का गठन किया था जिसमें राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तथा छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शामिल हैं।

कांग्रेस का मानना है कि राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, पूर्वोत्तर, आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना जैसे राज्य में कांग्रेस अपने बल-बूते पर लोकसभा का चुनाव लड़ना चाहती है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में जहां कांग्रेस उम्मीदवार दूसरे नंबर थे वहां भी कांग्रेस दावा ठोकने की तैयारी में है। कांग्रेस के लिए समस्या बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब, दिल्ली एवं पश्चिम बंगाल में सामने आ रही है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कहना है कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ही गठबंधन का नेतृत्व करेगी। ममता कांग्रेस को केवल दो सीट देने का ऑफर कर रही है, जबकि कांग्रेस छह से आठ सीट पर प्रतिद्वंद्विता करना चाहती है। उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव कांग्रेस को आठ से ज्यादा सीट देने को तैयार नहीं है। कांग्रेस उत्तर प्रदेश में ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। बिहार में राष्ट्रीय जनता दल एवं जनता दल-यू 17-17 सीटों पर चुनाव लड़ने का मन बना चुकी है। महागठबंधन कांग्रेस को चार तथा वामपंथी पार्टियों को दो सीट देने का विचार कर रही है। यहां भी सीटों के तालमेल को लेकर पेंच फंसा हुआ है।

पंजाब में आम आदमी पार्टी वहां सभी सीटों पर अपना उम्मीदवार खड़ा करने का मन बना रही है। आप के नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि उनकी पार्टी सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी। दिल्ली की सभी सात लोकसभा सीटों पर भी आप कांग्रेस को कुछ भी देने को तैयार नहीं है। विपक्षी दलों के इस रवैए को लेकर कांग्रेस पार्टी के नेता असमंजस्य की स्थिति में हैं। कांग्रेस का मानना है कि अगर सहयोगी दलों की शर्तों पर सीटों का तालमेल हुआ तो कांग्रेस को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। कांग्रेस भावी रणनीति को ध्यान में रखकर इस हद तक झुकने को तैयार नहीं दिख रही है। कुल मिलाकर इंडिया गठबंधन में सीटों के तालमेल का मुद्दा गंभीर बना हुआ है।