ब्रह्मा तीनों लोकों के जनक हैं। सृष्टिकर्ता आधार चक्र या मूलाधार चक्र और श्रोणि क्षेत्र पर शासन करता है जिसमें जननांग होते हैं। 24 घंटों की अवधि को 30 मुहूर्तों में विभाजित किया गया है, जिनमें से प्रत्येक की अवधि 48 मिनट है। सूर्योदय से पहले दो मुहूर्त होते हैं, जिनमें से पहले को ब्रह्म मुहूर्त कहा जाता है - ब्रह्मा का काल। मानव प्रजनन प्रणाली के संबंध में ब्रह्मा की सृजन क्षमता से मेल खाते हुए ब्रह्म मुहूर्त का शाब्दिक अर्थ सृजन की अवधि है। ब्रह्मा कमल से प्रकट हुए हैं। उच्च सम्मान में रखा जाने वाला कमल स्वयं पूजा के योग्य वस्तु है। यह कीचड़ और गंदगी से ऊपर उठता है, यह शुद्ध और अप्रदूषित रहता है। जो व्यक्ति ब्रह्म मुहूर्त में उठता है वह कमल के समान हो जाता है वह भौतिकवाद, इच्छाओं और जुनून के कीचड़ से ऊपर उठता है। हिंदू धर्म में कुछ ऐसे काम में बताए गए हैं, जिन्हें ब्रह्म मुहूर्त में करने से साधक को आर्थिक लाभ प्राप्त हो सकता है।
ब्रह्म मुहूर्त का समय : यहां ब्रह्म का अर्थ है- परमात्मा, ऐसे में ब्रह्म मुहूर्त का अर्थ हुआ परमात्मा का समय। ब्रह्म मुहूर्त का सामान्य समय आमतौर पर सुबह 4.24-5.12 बजे तक माना जाता है और यह सूर्योदय और स्थानों के आधार पर मौसम के अनुसार बदलता रहता है। सभी 30 मुहूर्तों में से, ब्रह्म मुहूर्त को क्या खास बनाता है? ब्रह्म मुहूर्त सूर्य और चंद्रमा के साथ ग्रहों के संबंधों को प्रभावित करता है ताकि मानव शरीर में आवश्यक परिवर्तन किए जा सकें ताकि यह आसानी से प्रार्थना, ध्यान, योग, सकारात्मकता और सात्विक पढ़ने का समर्थन कर सके।
करें इन मंत्रों का जाप : सुबह ब्रह्म मुहूर्त उठते ही सबसे पहले अपनी हथेली को देखें और इस मंत्र का जाप करें -
कराग्रे वसति लक्ष्मीः,कर मध्ये सरस्वती।
करमूले तू ब्रह्मा, प्रभाते कर दर्शनम्।।
इस मंत्र का अर्थ है कि हथेलियों में मां लक्ष्मी, देवी सरस्वती और भगवान विष्णु का निवास है और में सुबह-सुबह उनके दर्शन कर रहा हूं।
ये है चमत्कारी मंत्र : ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत होने के बाद सुखासन में बैठ जाएं। इसके बाद अपनी दोनों आंखों को बंद करके इस मंत्र का जाप करें -
ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरांतकारी भानुः शशि भूमि सुतो बुधश्च।
गुरुश्च शुक्र शनि राहु केतव सर्वे ग्रहा शांति करा भवंतु॥
इस मंत्र का जाप करने से साधक को देवी-देवताओं कीक कृपा प्राप्त होती है।