पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : पुलिस महानिदेशक जीपी सिंह ने विद्रोही समूह अल्फा (स्वतंत्र) को फिर आड़े हाथों लिया है। गौरतलब है कि अल्फा (स्वतंत्र) ने डीजीपी जीपी सिंह को चुनौती दी थी कि वे स्वदेशी अंगरक्षकों के बिना सात दिनों तक अकेले गुवाहाटी में घूमें। इसके जवाब में डीजीपी ने यह स्पष्ट कर दिया कि असम पुलिस किसी से उलझना नहीं चाहती। हालांकि,उन्होंने विद्रोही समूह को चेतावनी दी कि जो लोग असम की विकास यात्रा में बाधा डालना चाहते हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इतना ही नहीं, जहां असम पुलिस बांग्लादेशी प्रवासियों द्वारा कब्जा की गई भूमि को खाली करा रही है, वहीं म्यामां से तस्करी की गई दवाओं के खिलाफ छापेमारी कर रही है। अल्फा (स्वतंत्र) केवल बांग्लादेश और म्यामां में शिविर स्थापित करने के लिए डीजीपी जीपी सिंह ने अल्फा की कड़ी आलोचना की। डीजीपी जीपी सिंह ने शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा कि हम संविधान के दायरे में काम कर रहे हैं। हम असम के लोगों के लिए कोई खराब माहौल नहीं आने देंगे। हम राज्य के खिलाफ हर खतरे को कुचल देंगे। हम नहीं चाहते कि असम में दोबारा कोई खराब माहौल बने। हम असम की विकास यात्रा को बाधित करने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति को रोकेंगे और उसके साथ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 

सरकार ने असम में शांति लाने का निर्देश दिया है। हम सरकार के निर्देशानुसार काम कर रहे हैं। उन्होंने असम के लोगों से अच्छे और बुरे का निर्णय करने का आग्रह करते हुए कहा कि असम में एक बड़ी समस्या थी। हमेशा कहा जाता था कि बांग्लादेश से आए आप्रवासी यहां जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। यहां तक कि बटद्रवा थान और आरक्षित जंगलों की भूमि पर भी बांग्लादेश के लोगों ने कब्जा कर लिया था, लेकिन हमने पिछले डेढ़ साल में असम में लगभग 1,00,000 बीघे जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया है। जिन लोगों से जमीन पर अवैध कब्जा हटाया गया है वे बांग्लादेशी मूल के संदिग्ध लोग हैं, लेकिन जो लोग अब असम को धमकी दे रहे हैं, उन्होंने कभी बांग्लादेश में कैंप लगाए थे और असम में हमले किए थे। उनमें से कुछ के परिवार अभी भी बांग्लादेश में हैं। मैं अभी तक बांग्लादेश नहीं गया हूं, इसलिए जवाब उन्हें ही देना होगा। क्या यह अच्छा नहीं है कि हम बांग्लादेशियों को निकाल रहे हैं और 1,00,000 बीघे ज़मीन अतिक्रमण मुक्त करा रहे हैं? क्या यह अच्छा है कि वे बांग्लादेश में शिविर स्थापित कर रहे हैं? इसका जवाब भी उन्हें देना होगा। इसके अलावा हमने पिछले ढाई साल में नशे के खिलाफ कई कार्रवाई की है।

पिछले साल हमने 1,500 करोड़ रुपए की नशीली दवाएं जब्त कीं। इस दवा का स्रोत म्यामां है। जो लोग हमें धमकी देते हैं और असम की शांति और सद्भाव को बाधित करना चाहते हैं वे म्यामां में ही डेरा डाले हुए हैं। इसलिए,असम के लोगों को जवाब मांगना चाहिए कि क्या हमारे लिए ड्रग्स को जब्त करना बेहतर है या उनका म्यामां में शिविर स्थापित करना बेहतर है। जब मैंने अवैध गेंडे शिकार के खिलाफ अभियान चलाया तो मुझे सूचना मिली कि गेंडे के सींग म्यामां और चीन जा रहे हैं। अब उनके कैंप चीन और म्यामां में भी हैं। इसलिए लोगों को निर्णय करना होगा कि हमारा यहां काम करना बेहतर है या उनका वहां शिविर लगाना।