पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने शुक्रवार को गोहपुर में विश्वनाथ जिला प्रशासन के सहयोग से सांस्कृतिक मामलों के विभाग द्वारा आयोजित एक समारोह में शहीद कनकलता बरुवा के जन्म शताब्दी समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा ने कहा कि लोगों से कोलोनियल विरासत के सभी अवशेषों को मिटाने और एक आत्मनिर्भर राष्ट्र के निर्माण के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया है। सीएम हिमंत ने दावा किया कि आजादी के 100 साल पूरे होने तक गुलामी की सारी निशानियां मिटा दी जाएंगी।  हिमंत, असम के स्वतंत्रता सेनानी कनकलता बरुवा की जन्मशताब्दी के कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कनकलता बरुआ की उस घटना का जिक्र करते हुए कहा जिसमें 1942, भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान गोहपुर पुलिस स्टेशन परिसर में तिरंगा फहराने के लिए एक समूह का नेतृत्व करते समय कनकलता की पुलिस द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

शर्मा ने आगे कहा, जैसे-जैसे भारत आजादी के 100 साल की ओर बढ़ रहा है, हम सभी को अपनी कोलोनियल विरासत के सभी अवशेषों को खत्म करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। दूसरी ओर उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के करो या मरो नारे से प्रभावित होकर कनकलता बरुवा वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में कूद पड़ीं और अपनी देशभक्ति का प्रमाण दिया। अविभाजित दरंग जिले के एक हिस्से के रूप में गोहपुर के लोगों ने भारत से अंग्रेजों को बाहर निकालने के लिए बहादुरी से लड़ाई लड़ी। कनकलता बरुवा की जन्म शताब्दी मनाने के लिए उनके भाई द्वारा उन्हें लिखे गए पत्र का हवाला देते हुए सांस्कृतिक कार्य विभाग को इस अवसर को शानदार तरीके से मनाने की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने कहा कि  जैसा कि हम जन्म शताब्दी समारोह शुरू कर रहे हैं, मां भारती के प्रति उनकी वीरता और निर्विवाद प्रेम हमारे मार्ग को रोशन करे।

शताब्दी समारोह के एक भाग के रूप में प्रस्तावित कनकलता विश्वविद्यालय के निर्माण कार्यों को शुरू करने के अलावा कनकलता के निवास का संरक्षण और बोरोंगाबाड़ी क्षेत्र में 30 करोड़ रुपए के वित्तीय परिव्यय वाले एक स्मारक का कार्य किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन में कनकलता बरुवा की उत्साही भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि असम की महिलाएं किसी भी तरह से दूसरों से कम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि असम के इतिहास में असम की महिलाओं का साहस और बलिदान गहराई से समाहित है। महिलाओं में एकता और राष्ट्रवाद की भावना पैदा करने में असहयोग आंदोलन की भूमिका को स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी के असम छोडऩे के तुरंत बाद हिमंत कुमारी देवी, नलिनीबाला देवी, बिजुति फुकन, स्मृता भट्टाचार्जी, कृष्णमाया अग्रवाल, स्नेहलता देवी बरुवा, चंद्रप्रभा सैकियानी जैसी महिलाएं आंदोलन में कूद पड़ी थीं। डॉ. शर्मा ने कहा कि देश ने अपनी आजादी के 75 साल पूरे कर लिए हैं।