भारतीय संस्कृति के हिन्दू सनातन धर्म में प्रत्येक माह की तिथियों एवं व्रत त्यौहारों की अपनी खास पहचान है। तिथि विशेष पर पूजा-अर्चना करके सर्व मनोकामना की पूर्ति की जाती है। मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि की अपनी खास पहचान है। पौराणिक मान्यता के अनुसार मोक्षदा एकादशी के दिन भक्त श्रीहरिविष्णु जी की पूजा के साथ ही षोडशकलायुक्त भगवान् श्रीकृष्ण की भी पूजा-अर्चना की जाती है। अपने पिछले पापों का शमन एवं सुख-सौभाग्य की कामना के निमित्त यह व्रत करते हैं। 23 दिसंबर, शनिवार को गीता जयंती का पर्व भी हर्ष-उमंग, उल्लास के साथ मनाया जाएगा। प्रख्यात ज्योतिषविद् विमल जैन ने बताया कि मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि मोक्षदा एकादशी के नाम से जानी जाती है। इस बार मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि 22 दिसंबर, शुक्रवार को प्रातः 8 बजकर 17 मिनट पर लगेगी जो कि अगले दिन 23 दिसंबर, शनिवार को प्रातः 7 बजकर 13 मिनट तक रहेगी। अश्विनी नक्षत्र 22 दिसंबर, शुक्रवार को रात्रि 9 बजकर 36 मिनट तक रहेगा, जबकि भरणी नक्षत्र 23 दिसंबर, शनिवार को रात्रि 9 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। शिवयोग 22 दिसंबर, शुक्रवार को दिन में 11 बजकर 11 मिनट पर लगेगा जो कि 23 दिसंबर, शनिवार को दिन में 9 बजकर 08 मिनट तक रहेगा। तत्पश्चात् सिद्धयोग प्रारंभ हो जाएगा। 24 दिसंबर, रविवार को प्रातः 7 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। जिसके फलस्वरूप 22 दिसंबर, शुक्रवार को स्मार्तजन श्रीहरि विष्णुजी की पूजा-अर्चना करके मोक्षदा एकादशी का विधि-विधानपूर्वक व्रत रखेंगे, जबकि वैष्णवजन 23 दिसंबर, शनिवार को व्रत रखकर श्रीहरि विष्णुजी का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। इस बार शिव एवं सिद्धयोग का अनुपम संयोग बन रहा है, जो कि व्रतकर्ता के लिए विशेष पुण्य फलदाई रहेगा।
पूजा का विधान : ज्योतिषविद् ने बताया कि व्रतकर्ता को व्रत के पूर्व (दशमी तिथि के दिन) रात्रि में कुछ भी ग्रहण नहीं करना चाहिए। एकादशी (व्रत) के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर अपने समस्त दैनिक कृत्यों से निवृत्त होकर गंगा-स्नानादि करके स्वच्छ वस्त्र वस्त्र धारण करना चाहिए। गंगा-स्नान यदि संभव न हो तो घर पर ही स्वच्छ जल से स्नान करना चाहिए। अपने आराध्य देवी-देवता की पूजा-अर्चना के पश्चात् मोक्षदा एकादशी के व्रत का संकल्प लेना चाहिए। संपूर्ण दिन व्रत उपवास रखकर जल आदि कुछ भी ग्रहण नहीं करना चाहिए। विशेष परिस्थितियों में दूध या फलाहार ग्रहण किया जा सकता है। आज के दिन सम्पूर्ण दिन निराहार रहना चाहिए, चावल तथा अन्न ग्रहण करने का निषेध है।
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