अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन परत का छेद हर साल बढ़ता और घटता है। वहीं सालाना औसत या अधिकतम की बात की जाए तो साल 2022 तक वह पिछले लगातार दो दशकों से छोटा हो जा रहा था। लेकिन हाल में ओजोन परत की तस्वीरें कुछ और ही कहानी कह रही हैं। यूरोपीय स्पेस एजेंसी की सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण बताता है कि इस साल अंटार्किटिका के ऊपर की ओजोन परत का छेद बहुत ही विशाल आकार लेकर नया अभूतपूर्व रिकॉर्ड बनाने की ओर है। इन तस्वीरों के विश्लेषण के बाद शोधकर्ताओं ने बताया है कि यह छेद अब तक का देखा गया सबसे बड़ा ओजोन छेद है जो कि ब्राजील देश के आकार से तीन गुना बड़ा है।
बन गया है नया रिकॉर्ड : ईसा की कॉपरनिकस सेनिटनल-5 पी सैटेलाइल की तस्वीरें हाल ही में जारी की गई हैं जिनके विश्लेषण से यह खुलासा हुआ है। वैज्ञानिकों का कहना है कि सितंबर में ओजोन परत का वार्षिक छेद के आकार ने नया रिकॉर्ज बनाया है वेदरडॉटकॉम को दिए इंटरव्यू में अमेरिका के नेशनल ओएशियानिक एंड एट्मस्पियरिग एडमिनिस्ट्रेशन नोआ के ग्लोबल मॉनिटरिंग लैबोरेटरी के प्रमुख वैज्ञानिक स्टीफन मोंन्जका का कहना है कि ओजोन परत में बहुत बदलाव होते रहे हैं।
ओजोन पर में साल के अंदर होने वाले बदलाव : ओजोन परत के छेद में साल भर बदलाव होता है। सितंबर के समय यह हर साल समय बड़ा दिखाई देता है। वास्तव में यह किसी तरह का छेद नहीं बल्कि अंटार्कटिका के ऊपर वायुमंडल का (खास तौर से ओजन) का पतला होना है। यह छेद अगस्त से अक्टूबर के बीच में सबसे बड़ा होता है। इसकी प्रमुख वजह तापमान और मौसम में बदलाव होते हैं।
कैसे शुरू होती है छेद बनने की प्रक्रिया : ओजन परत में छेद की प्रमुख वह यहां के चरम मौसम और अन्य हालात होते हैं। अंटार्कटिका में ठंड और अंधेरी सर्दियां वायुमंडल में बहुत ऊपर खास तरह के ध्रुवीय समातापमंडलीय बादलों का निर्माण करती हैं। ये अंधेरा खत्म होने के बाद सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों से सक्रिय होकर ओजोन को खत्म करने वाले रसायनों से प्रतिक्रिया करते हैं।
कैसे होता छेद : ये रासयनिक प्रतिक्रियाएं एक तरह की शृंखला में चलती हैं जिसमें ओजोन भारी मात्रा में खत्म होने लगती है जिससे अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन की मात्रा कम होने लगी है यानि कि यह परत पतली होने लगती जिसे एक स्तर के बाद हम छेद का नाम दे देते हैं। यह छेद 1970 के दशक में सबसे पहले देखा गया था जिसके बाद पाया गया था कि मानवजनित प्रदूषणों की वजह से ये बढ़ता जा रहा है।
लेकिन इस साल बड़ा कैसे हो गया? : पिछले साल तक यह छेद काफी छोटा हो गया था और दो दशकों से छोटा हो रहा था। लेकिन 2023 में यह ब्राजील से भी तीन गुना आकार जितना बड़ा हो गया। विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल इतना बड़ा अंतर आने की वजह साल 2022 में टैंगों में प्रशांत महासागर के अंदर हुए विशालकाय ज्वालामुखी विस्फोट की घटना थी।