आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर भाजपा ने राजस्थान, मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ में जातिगत समीकरण को साधते हुए अनूठा प्रयोग किया है। मुख्यमंत्री के चयन के मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने फैसले से सबको चौंका दिया है। कहने को तो मुख्यमंत्री का चयन भाजपा विधायकों ने किया है, किंतु असल में तीनों राज्यों के मुख्यमंत्री मोदी की पसंद हैं। मध्यप्रदेश में भाजपा ने मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाकर उत्तर प्रदेश एवं बिहार के यादव मतदाताओं को रिझाने का प्रयास किया है। उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव एवं बिहार में लालू प्रसाद यादव से मिल रही चुनौती का जवाब मोहन यादव के रूप में देखा जा रहा है। मध्यप्रदेश में राजेन्द्र शुक्ला एवं जगदीश देवड़ा को उपमुख्यमंत्री बनाकर ब्राह्मण एवं दलित समुदाय को भी पाले में करने की कोशिश की गई है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर को विधानसभा का अध्यक्ष बनाने की घोषणा कर राजपूत मतदाताओं को भी खुश करने का प्रयास किया गया है। राजस्थान में मुख्यमंत्री का चुनाव भाजपा के लिए कठिन चुनौती बनी हुई थी। इसका कारण यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री बनने के लिए लगातार दबाव डाल रही थीं। नौ दिनों की जद्दोजहद के बाद भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री के उम्मीदवार के रूप में सर्वसम्मति से चयन किया गया। शर्मा हालांकि पहली बार सांगानेर विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने हैं, किंतु संगठन के बारे में उनका लंबा अनुभव रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ-साथ भजनलाल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भी पसंद हैं। भाजपा ने भजनलाल को मुख्यमंत्री बनाकर ब्राह्मण कार्ड खेला है। देश के ब्राह्मण मतदाता भाजपा के कोर वोटर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों से सनातन धर्म एवं ब्राह्मणों पर कुछ विपक्षी पार्टी के नेताओं द्वारा हमले होते रहे हैं।
यही कारण है कि भाजपा ने ब्राह्मण कार्ड खेलकर लोकसभा चुनाव के लिए बड़ी पहल की है। राजस्थान में 18 प्रतिशत ब्राह्मण वोटर हैं। राजस्थान में भी भाजपा ने दीया कुमारी एवं प्रेमचंद्र बैरवा को उपमुख्यमंत्री बनाकर महिला, राजपूत एवं दलित मतदाताओं को भाजपा के समर्थन में लाने की पहल की गई है। विधानसभा अध्यक्ष के लिए घोषित उम्मीदवार वासुदेव देवनानी सिंधी समुदाय से आते हैं। राजस्थान के अजमेर, भीलवाड़ा, जयपुर, जोधपुर, कोटा एवं उदयपुर में काफी संख्या में सिंधी मतदाता हैं। भजनलाल के चुनाव वसुंधरा राजे के लिए बहुत बड़ा धक्का है जो फिर से राज्य का मुख्यमंत्री बनना चाहती थीं। वर्ष 2003 से लेकर 2023 तक राजस्थान में वसुंधरा का दबदबा रहा है।
दो बार वे राज्य की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। भाजपा ने उपरोक्त तीनों राज्यों में अनूठा प्रयोग वर्ष 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर किया है। छत्तीसगढ़ में भी भाजपा ने तमाम बड़े नेताओं को दरकिनार कर आदिवासी नेता विष्णुदेव साय को मुख्यमंत्री की कमान सौंप कर साहसिक निर्णय लिया है। छत्तीसगढ़ में लगभग 31 प्रतिशत आदिवासी मतदाता हैं। छत्तीसगढ़ से पूरे देश के आदिवासी मतदाताओं को साधने का प्रयास किया गया है। अरुण साव एवं विजय शर्मा को उपमुख्यमंत्री बनाकर पिछड़े वर्ग एवं ब्राह्मण समाज को भाजपा से जोड़ने की कोशिश की गई है। मध्यप्रदेश में 52 प्रतिशत मतदाता पिछड़े वर्ग से आते हैं। तीनों राज्यों में भाजपा का अनूठा प्रयोग लोकसभा चुनाव के लिए विपक्षी दलों को करारा जवाब है, जो जातिगत मुद्दे पर भाजपा को घेरने की रणनीति बना रहे थे।