यूपी के झांसी स्थित पारीछा थर्मल पावर प्लांट से बड़ी संख्या में राख निकलती है। इस पावर प्लांट में कोयले से बिजली बनाई जाती है। जबकि कोयला जलने के बाद जो राख बच जाती है उसका निस्तारण एक बड़ी समस्या है। राख की वजह से पावर प्लांट के आसपास आने वाले लोगों के स्वास्थ्य को भी बहुत नुकसान पहुंचता है। हालांकि अब इस पावर प्लांट से निकलने वाली राख का एक सकारात्मक इस्तेमाल किया जाएगा। दरअसल इस राख से खाद बनाई जाएगी। बता दें कि पारीछा थर्मल पावर प्लांट में अलग-अलग मेगावाट की कुल 6 इकाईयां हैं। इन सभी से हर रोज लगभग 13 हजार मीट्रिक टन राख निकलती है। इसके निस्तारण के लिए अब पारीछा प्लांट के प्रशासन ने वन विभाग को जिम्मेदारी सौंपी है। विभाग इसी राख से खाद बनाएगा। राख से तैयार होने वाला खाद पूरी तरह जैविक होती है, जो पौधों के लिए काफी लाभकारी साबित हो सकती है। यही वजह है कि यहां तैयार की गई खाद पौधरोपण अभियान में लगाए गए पौधों में डाली जाएगी।
तैयार की जाएगी जैविक खाद : झांसी के प्रभागीय वन अधिकारी एमपी गौतम में बताया कि पारीछा पावर प्लांट की राख को इस्तेमाल करने की योजना तैयार की गई है। राख से खाद तैयार करने की प्रक्रिया काफी आसान होती है। थोड़ी सी मिट्टी के ऊपर राख को फैला देने के बाद उसे लगभग 50 दिन तक बंद करके रखना होता है। इसके बाद खाद तैयार हो जाती है। इससे एक तरफ जहां राख का सकारात्मक इस्तेमाल हो सकेगा, तो वहीं खाद पर आने वाला खर्च भी काफी कम हो जाएगा। इसका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया गया है।