हाल ही में संपन्न राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आ गए हैं , जबकि मिजोरम विधानसभा का चुनाव नतीजा कल आएगा। आज हुई मतगणना के परिणामस्वरूप  भाजपा  मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में चुनाव जीतने में कामयाब रही,वहीं तेलंगाना में कांग्रेस को ऐतिहासिक जीत मिली। भाजपा मध्य प्रदेश में जहां अपनी सत्ता बचाने में कामयाब रही, वहीं उसने कांग्रेस से छत्तीसगढ़ और राजस्थान की सूबेदारी छीन ली। कांग्रेस ने तेलंगाना में पहली बार सत्ता हासिल की, उसने तेलंगाना के संस्थापक और वहां के मुख्यमंत्री केसीआर की पार्टी बीआरएस को सत्ता से बाहर कर दिया। राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भाजपा की जीत ने स्पष्ट कर दिया कि हिंदीपट्टी में भाजपा बहुत मजबूत है,जो 2024 के लोकसभा चुनाव में ये राज्य उसके लिए बुस्टर का काम करेंगे। भाजपा दक्षिण भारत में चाहकर भी खुद को मजबूत नहीं कर पा रही है। दक्षिण के राज्य तमिलनाडु में द्रमुक, कर्नाटक में कांग्रेस, आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी की पार्टी तो केरल में माकपा की सरकार है और अब तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है।

इस तरह देखें तो साउथ इंडिया में भाजपा अभी तक पसंदीदा पार्टी नहीं बन पाई है, वैसे उसने तेलंगाना में 8 सीटें जीतकर अपनी आशा बरकरार रखी है क्योंकि 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को तेलंगाना में चार सीटों पर विजय मिली थी। इस चुनाव ने स्पष्ट कर दिया कि भारत की राजनीति में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कोई बड़ा चेहरा नहीं है। चुनावी राजनीति में मोदी ऐसी शख्सियत हैं, जिनके चेहरे को देखकर मतदाता वोट करते हैं, फिलहाल मतदाता यह नहीं देख रहे कि उनकी सीट पर भाजपा या उसके समर्थक पार्टी का कौन उम्मीदवार है। वे मोदी को वोट करना चाहते हैं। इसलिए मोदी के प्रार्थी लगातार जीत रहे हैं। दूसरी ओर इस चुनाव ने यह भी साबित कर दिया कि राममंदिर और हिंदुत्व के आगे जात-पात की राजनीति फीकी पड़ गई है। साथ ही जातिगत गणना इन राज्यों में चुनावी मुद्दा नहीं बन सका और लोगों ने जाति की जगह धर्म के आधार पर वोट दिया और भाजपा की नीति में अपनी आस्था जताई। जानकार बताते हैं कि जब  22 जनवरी को अयोध्या में राममंदिर का उद्घाटन किया जाएगा और उसके बाद भाजपा की योजना के अनुसार देशभर से लोगों को लाकर अयोध्या में दर्शन कराया जाएगा तब मतदाताओं में हिंदुत्व  के नाम पर ज्वार आ सकता है और यह ज्वार लोकसभा चुनाव- 2024 में भाजपा के लिए काफी फलदायक साबित हो सकता है। वैसे विपक्ष ने लोकसभा चुनाव से पूर्व जातिगत गणना और पिछड़े और अति पिछड़ों के लिए आरक्षण बढ़ाने की मांग तेज कर दी है।

विपक्षी की मंशा लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव को कमंडल बनाम मंडल बनाना है। पूर्व के अनुभव बताते हैं कि पूर्व में कमंडल को मंडल करारा झटका दे चुका है, इसलिए विपक्ष बार-बार भाजपा को जातीय गणना और आरक्षण का विरोधी बता रही है,परंतु भाजपा इस बार बड़ी सतर्कता के साथ इस बार खुद को मंडल के साथ बता रही है। बिहार प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष सम्राट चौधरी का कहना है कि बिहार में जातीय गणना को पूरा करने में भाजपा की अहम भूमिका है।  भाजपा ने जातीय गणना कराने के प्रस्ताव का विधानसभा में समर्थन किया तब जाकर यह कार्य शुरू हुआ और अब आंकड़े सामने आ चुके हैं। दूसरी ओर जारी आंकड़ों के मुताबिक पिछड़ी जातियों और अति पिछड़ी जातियों के लिए आरक्षण का कोटा बढ़ाने का भी समर्थन किया, जिसके बदौलत आरक्षण का कोटा ईडब्ल्यूएस सहित 75 फीसदी हो गया है। सम्राट चौधरी तो यहां तक कहते हैं कि भाजपा आरक्षण का कोटा 80 प्रतिशत करना चाहती है ताकि ईबीएस से संबंधित लोगों को न्याय मिल सके। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि भाजपा विपक्ष के लिए ऐसा कोई गैप नहीं छोडऩा चाहती, जिसके सहारे विपक्ष अपना राजनीति को चमका सके और चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कर सके। भाजपा की चुनावी रणनीति विपक्षी की तैयारी पर पूरी तरह हाबी दिखी और अब नतीजा सामने है। भाजपा अपनी सधी राजनीति से विपक्ष को पछाड़ रही है, जो उसकी राजनीतिक सूझबूझ को प्रदर्शित करता है।