वन विभाग ग्रामीणों व यात्री पर्यटकों की मुहिम का नतीजा है कि आस्था, तीर्थाटन, पर्यटन व ट्रैकिंग की त्रिवेणी चतुर्थ केदार रुद्रनाथ धाम में प्लास्टिक उन्मूलन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अब तक आए छह हजार यात्री, पर्यटक अपने साथ ले गई प्लास्टिक कचरे को वापस वन विभाग के कार्यालय में जमा कर दिया गया स्वच्छता शुल्क वापस ले गए हैं। इस मुहिम का नतीजा है कि यात्री शत प्रतशित कचरे को अपने साथ लेकर स्वच्छता की राशि पाने में सफल रहे। चमोली जिले में समुद्रतल से 11808 फीट की ऊंचाई पर स्थित चतुर्थ केदार रुद्रनाथ की यात्रा अति दुर्गम है। रुद्रनाथ के लिए जिला मुख्यालय गोपेश्वर से चोपता मोटर मार्ग पर तीन किमी हाइवे से सफर तय कर सगर गांव से 19 किमी पैदल यात्रा करनी पड़ती है। केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के बफर जोन में होने के चलते पर्यटकों, तीर्थयात्रियों, ट्रेकरों की आवाजाही से पर्यावरण संरक्षण किसी चुनौती से कम नहीं था। समस्या यह थी कि इस क्षेत्र में कस्तूरा, मोनाल, हिम तेदुंआ सहित कई दुलर्भ वन्य जीव जन्तुओं का प्राकृृतिक आवास है।

यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्रियों द्वारा खाने-पीने के बाद कूड़ा जगह-जगह फेंकने से मखमली बुग्यालों में गंदगी आम बात थी। जंगली जानवरों के इस प्लास्टिक कचरे को खाने का खतरा भी रहता था। वन नियमों की दुहाई देने के साथ-साथ नियमों के तहत कार्रवाई करने के बाद भी प्लास्टिक कचरे पर लगाम नहीं लगाया जा रहा था। चतुर्थ केदार रुद्रनाथ धाम की यात्रा भले ही ग्रीष्मकाल में छह माह होती है लेकिन इस रूट पर प्लास्टिक व कचरा एक बड़ी समस्या बनकर आ रही थी। वर्ष 2020-21 में केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग ने स्थानीय ग्रामीणों के साथ विचार विमर्श कर निर्णय लिया कि प्लास्टिक कचरों से बुग्यालों, जंगलों को बचाने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाए। यात्री पर्यटकों को भी यात्रा के साथ पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान के लिए प्रेरित किया जाए। फिर रुद्रनाथ के प्रवेश द्वार सगर में तीर्थयात्री के पंजीकरण का निर्णय लेते हुए स्वच्छता शुल्क भी निर्धारित किया गया।

वर्तमान समय में 150 रुपए पंजीकरण शुल्क के अलावा 100 रुपए स्वच्छता शुल्क लिया जा रहा है। इस दौरान वन विभाग की चेक पोस्ट में चैकिंग के दौरान तीर्थयात्रियों के साथ किसी भी रूप में जाने वाले प्लास्टिक कचरे की सूची बनाई जाती है। यात्री पर्यटकों को इससे वन्य जीवों, मखमली बुग्यालों में हो रहे नुकसान को समझाते हुए पर्यावरण संरक्षण में उनकी भूमिका सुनिश्चित करने का अनुरोध किया जाता है। यात्री पर्यटक भी अपनी यात्रा को यादगार बनाने के लिए वन विभाग की इस मुहिम का हिस्सा बनने के लिए खुशी खुशी राजी हो जाता है। धाम से लौटते हुए वन विभाग के चैक पोस्ट पर फिर से यात्री, पर्यटक, ट्रेकर के सामान सूची की जांच होती है।