पर्यावरण संरक्षण जरूरी है। इसे लेकर विभिन्न स्तरों पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। अभियान का फायदा भी हो रहा है। लेकिन वनों की कटाई भी बदस्तूर जारी है। हालांकि एक गांव ऐसा है, जो पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहा है। इस गांव में हर व्यस्क पर 95-95 पेड़ों के संरक्षण व संवर्धन की जिम्मेदारी है। लोग इस जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन भी कर रहे हैं। बात हो रही है बोकारो के गोमिया प्रखंड के उदा मंझलीटांड़ गांव की। यहां की ग्राम सभा व वन अधिकार सुरक्षा समिति की अगुआई में ग्रामीण अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण की यह तरकीब एकाएक नहीं मिली, बल्कि विवाद से निकला आइडिया गांववालों के काम कर गया। दरअसल 2021 में महुआ चुनने को लेकर विवाद हो गया था। इससे  पहले भी महुआ चुनने को लेकर विवाद होते रहता था।

अंतत: ग्राम सभा ने महुआ के पेड़ों की गिनती करवाई। गिनती के बाद सभी व्यस्क पुरुष के लिए 95-95 पेड़ चिह्नित किए गए। कुल 12800 पेड़ों के संरक्षण व संवर्धन की जिम्मेदारी ग्रामीणों को दी गई। पेड़ के अलावा जंगल में मौजूद सभी पेड़ों को बचाने का संकल्प ग्रामीणों ने लिया। इस फैसले से ना सिर्फ पर्यावरण संरक्षित हो रहा है, बल्कि ग्रामीणों की आजीविका का साधन भी बढ़ा है। इसी साल सियारी पंचायत ने केंद व पियार फल के जरिए साढ़े बारह लाख रुपए की कमाई की है। इस गांव से प्रेरित होकर डबार ग्राम सभा ने भी काम करना शुरू किया है।

ग्रामीणों ने पेड़-पौधों की रक्षा के लिए एक विशेष दल बनाया है। दल की जिम्मेदारी हर्बल गार्डन का निर्माण करना है। साथ ही, जड़ी-बूटी के प्रयोग का प्रसार लोगों तक करना है। ग्राम सभा में शिवलाल टुडू, ढेनाराम मांझी, दीनाराम मांझी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। वहीं वन अधिकार सुरक्षा समिति में शिवलाल टुडू अध्यक्ष व नीरूलाल मांझी सचिव की भूमिका निभा रहे हैं। पर्यावरण के जानकार गुलाबचंद ने बताया कि गांव में विभिन्न कार्यों के लिए समिति का निर्माण किया गया है। उद्देश्य पर्यावरण का संरक्षण के साथ-साथ आजीविका का साधन बढ़ाना है। पिछले दिनों बोकारो डीडीसी कीर्ति श्री ने गांव का दौरा कर ग्रामीणों के काम को देख खुशी जताई थी।