प्रख्यात ज्योतिषविद् विमल जैन ने बताया कि दीपोत्सव का पंचम व अन्तिम पर्व भैया दूज के रूप में मनाया जाता है। भाई-बहन के स्ïनेह का पर्व भैयादूज, यमद्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। भैयादूज के दिन बहन के घर भाई को जाकर भोजन करने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि को यम का पूजन किया जाता है, जिसे यम द्वितीया भी कहते हैं। 15 नवंबर, बुधवार को यह पर्व मनाया जाएगा।  विमल जैन ने बताया कि इस बार द्वितीया तिथि 14 नवम्बर, मंगलवार को दिन में 2 बजकर 37 मिनट से 15 नवंबर, बुधवार को दिन में 1 बजकर 48 मिनट तक रहेगी।

भैया दूज के दिन भाई बहन के घर जाकर उसके हाथ से बना भोजन ग्रहण करता है। आज बहनें रीति-रिवाज के मुताबिक अपने भाइयों को टीका लगाकर उनके दीर्घायु व शुभ मंगल की कामना करती हैं। उसे भगवती लक्ष्मीजी की कृपा से सुख-समृद्धि, खुशहाली प्राप्त होती है। भाई-बहन एक दूसरे को उपहार प्रदान करते हैं। कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भगवान् चित्रगुप्त जी की जयन्ती मनाने की मान्यता है। इस दिन कलम दवात की भी पूजा-अर्चना की जाती है। 

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