अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता' अंजनी पुत्र भक्त शिरोमणि भगवान् श्री हनुमान जी के जन्म महोत्सव का महापर्व काॢतक कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। श्री हनुमान जी का जन्म महोत्सव वर्ष में दो बार मनाने की पौराणिक मान्यता है। प्रथम चैत्र शुक्लपक्ष की पूर्णिमा तिथि तथा द्वितीय काॢतक कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 11 नवंबर, शनिवार को मनाया जाएगा। कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 11 नवंबर, शनिवार को दिन में 1 बजकर 59 मिनट पर लगेगी जो 12 नवंबर, रविवार को दिन में 2 बजकर 46 मिनट तक रहेगी। मेष लग्न सायं 03 बजकर 48 मिनट से सायं 05 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। मंगलवार व शनिवार श्रीहनुमान जी को समॢपत है। शनिवार के दिन श्रीहनुमान जी का जन्मोत्सव पडऩे से पूजा-अर्चना विशेष फलदाई हो गई है। प्रख्यात ज्योर्तिविद् विमल जैन ने बताया कि काॢतक कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को सायंकाल मेष लग्न में श्रीहनुमानजी का जन्म महोत्सव मनाया जाता है।
इस दिन व्रत उपवास रखकर श्रीहनुमान जी की पूजा-अर्चना करने से जीवन में सुख, समृद्धि, खुशहाली बनी रहती है। साथ ही समस्त संकटों का निवारण भी होता है, जैसा कि श्रीहनुमान चालीसा में बतलाया गया है—'संकट तें हनुमान छुड़ावै। मनक्रम बचन ध्यान जो लावै॥'
पौराणिक मान्यता :ज्योतिषविद् ने बताया कि पवनसुत भक्त शिरोमणि श्रीहनुमान जी के विराट स्वरूप में इंद्रदेव, सूर्यदेव, यमदेव, ब्रह्मदेव, विश्वकर्मा जी एवं ब्रह्मा जी की शक्ति समाहित है। शिव महापुराण के अनुसार पृथ्वी, जल, वायु, आकाश, सूर्य, चंद्रमा, अग्नि व यजमान ये आठ स्वरूप शिवजी के प्रत्यक्ष रूप बताए गए हैं। एक मान्यता के अनुसार श्रीहनुमान जी ब्रह्म स्वरुप भगवान शिव के ग्यारहवें अंश के रुद्रावतार भी माने गए हैं। कलियुग में श्रीहनुमान जी को अमरत्व का वरदान प्राप्त है। एकाक्षर कोश के मतानुसार हनुमान शब्द का अर्थ है—'ह शिव, आनन्द, आकाश एवं जल। 'नु' पूजन और प्रशंसा। 'मा' श्रीलक्ष्मी और श्रीविष्णु। 'न' बल और वीरता। भक्त शिरोमणि श्रीहनुमान जी अखण्ड जितेन्द्रियता, अतुलित बलधामता, ज्ञानियों में अग्रणी आदि अलौकिक गुणों से सम्पन्न होने के कारण देवकोटि में माने जाते हैं।
श्रीहनुमान जी की पूजा का विधान : ज्योतिषविद् ने बताया कि प्रात: ब्रह्म मूहूर्त में दैनिक नित्य-कृत्यों से निवृत्त हो स्वच्छ वस्ïत्र धारण करना चाहिए। तत्पश्ïचातï अपने आराध्य देवी-देवता की पूजा-अर्चना करके श्रीहनुमान जी के व्रत का संकल्प लेना चाहिए। भगवान श्रीहनुमान जी का शृंगार करके उनकी महिमा में विविध स्तुतियां, श्री हनुमान चालीसा, श्री सुंदरकांड, श्री पंचमुखी हनुमत् स्तोत्र, श्री हनुमत् सहस्रनाम का पाठ करने के पश्ïचातï् श्रीहनुमान जी की आरती करनी चाहिए। इस दिन श्रीरामचरित मानस का पाठ के साथ ही श्रीहनुमानजी से सम्बन्धित विविध मंत्रों का जप आदि करना विशेष लाभकारी रहता है। आज के दिन व्रत रखकर भगवान श्री हनुमान जी की विशेष अनुकम्पा प्राप्त की जाती है। ऐसी मान्यता है कि श्रीहनुमान जी शीघ्र प्रसन्न होकर अपने भक्त को सुख-समृद्धि, खुशहाली का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। जीवन के समस्त संकटों के निवारण के लिए श्रीहनुमान जी की आराधना विशेष फलदाई मानी गई है।
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