आश्विन शुक्ल प्रतिपदा रविवार (15 अक्तूबर) से शारदीय नवरात्रि प्रारंभ हो रही है और 23 अक्तूबर को समाप्त होगी।  इस वर्ष नवरात्रि में देवी मां दुर्गा का आगमन हाथी की सवारी पर होगा जो कि अत्यंत शुभ माना जाता है।  30 साल बाद नवरात्रि पर बन रहा है अद्भुत संयोग : इस बार नवरात्रि  पर ज्योतिषीय दृष्टिकोण अनुसार  नवरात्रि का आरम्भ शश योग बुधादित्य योग एवम भद्र योग नामक राजयोग के साथ होगा जो कि 30 वर्षों बाद अत्यंत दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र अनुसार इस योग में देवी की आराधना करना  शुभ फल देने वाली एवम सुख सम्रद्धि प्रदान करती हैं।

घट स्थापना मुहूर्त : देवी भागवत में प्रातः के समय ही देवी का आह्वान, स्थापना व पूजन करने को लिखा है, जिसमें चित्रा नक्षत्र एवं वैधृति योग को त्याज्य बताया है, किंतु इन दोनों के आदि के दो चरणों को त्याग कर घट स्थापना करने की अनुमति भी प्रदान की है। आश्विन शुक्ल प्रतिपदा रविवार को चित्रा नक्षत्र सायं 6-12 बजे तक तथा वैधृति दिन के 10-24 बजे तक हैं। किंतु उपरोक्त मतानुसार इस दिन चित्रा -वैधृति के प्रथम दो चरण सूर्योदय पहले की समाप्त हो चुके हैं अतः नवरात्र का प्रारंभ प्रातः काल  6.30 से  8.47 बजे तक करना सर्वश्रेष्ठ समय रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11.50 से 12.36 बजे तक भी  घट स्थापना की जा सकती हैं। चौघड़ियों के हिसाब से घट स्थापना करने वाले प्रातः 7.55 से दिन के 12 बजकर 13 मिनट तक चर, लाभ व अमृत के चौघड़िए में तथा दोपहर बाद 1.38  से  3.04 बजे तक शुभ के चौघड़िए में भी घट स्थापना कर सकते हैं।   

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