नई दिल्ली : चंद्रयान-3 और आदित्य एल-1 के सफल मिशन के बाद इसरो अब शुक्रयान की तैयारी कर रहा है। मंगल, चांद और सूर्य के बाद इसरो ने शुक्र ग्रह पर यान भेजने की तैयारी कर दी है। हमारे सौरमंडल पर स्थित शुक्र धरती के सबसे नजदीक ग्रह है। शुक्र ग्रह पर वायुमंडलीय दबाव धरती से 100 गुना ज्यादा है। इसरो चीफ एस सोमनाथ ने बताया कि शुक्र ग्रह पर अध्ययन से धरती के भविष्य को सुधारने में मदद मिलेगी। चंद्रयान-3 को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतारने और प्रज्ञान रोवर के चांद की सतह पर लगभग 100 मीटर से अधिक घूमने के लगभग एक महीने और सूर्य पर यान भेजने के चंद दिनों बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अब अपनी नजरें शुक्र पर नजर टिका दी हैं।

इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने पुष्टि की है कि भारत का अगला मिशन हमारे सौर मंडल का सबसे चमकीले ग्रह शुक्र होगा। मिशन के लिए पेलोड पहले ही विकसित किए जा चुके हैं, जो भारत के अंतरिक्ष अन्वेषण प्रयासों में मील का पत्थर है। मिशन को अनौपचारिक रूप से शुक्रयान नाम दिया गया है। इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने दिल्ली में भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी को संबोधित करते हुए शुक्र मिशन पर विस्तार से बात की। इस मिशन को अनौपचारिक रूप से शुक्रयान नाम दिया गया है। शुक्र मिशन का फोकस ग्रह की सतह और वातावरण का अध्ययन करना है, जो बेहद मोटी है और एसिड से भरी हुई है। शुक्र पर वायुमंडलीय दबाव पृथ्वी से लगभग 100 गुना अधिक है, जो इसे अन्वेषण के लिए एक चुनौतीपूर्ण वातावरण बनाता है।

इसरो प्रमुख सोमनाथ ने  कहा कि यह एक बहुत ही दिलचस्प ग्रह है। इसका एक वातावरण भी है। इसका वातावरण इतना घना है कि आप इसकी सतह में प्रवेश नहीं कर सकते। आप नहीं जानते कि इसकी सतह कठोर है या नहीं। उन्होंने आगे कहा कि शुक्र का अध्ययन हमारे अपने ग्रह के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी एक दिन शुक्र ग्रह हो सकती है। मुझे नहीं पता। हो सकता है कि 10,000 साल बाद हम (पृथ्वी) अपनी विशेषताएं बदल लें। पृथ्वी कभी ऐसी नहीं थी। बहुत समय पहले यह रहने योग्य जगह नहीं थी।