हिन्दू धर्मशास्त्रों में मान्यता के अनुसार भाद्रपद शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि के दिन हरितालिका तीज का व्रत रखने का विधान है। सुहाग की रक्षा का प्रमुख व्रत है—हरितालिका तीज। सौभाग्यवती महिलाएं अखण्ड सौभाग्य की कामना के लिए इस व्रत को रखती हैं। कुंवारी कन्याएं भी मनोवांछित एवं उपयुक्त वर की प्राप्ति के लिए इस व्रत को करती हैं। यह व्रत गौरी तृतीया के रूप में भी जाना जाता है। हरितालिका तीज पर व्रत व उपवास रखकर भगवान् शिव तथा भगवती पार्वती जी एवं प्रथम पूज्यदेव श्रीगणेशजी की विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना करती हैं। इस बार यह व्रत 18 सितंबर को रखा जाएगा। ज्योतिषविद् विमल जैन ने बताया कि भाद्रपद शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि 17 सितंबर को दिन में 11 बजकर 10 मिनट पर लगेगी जो कि 18 सितंबर को दिन में 12 बजकर 40 मिनट तक रहेगी। 17 सितंबर को दिन में 10 बजकर 02 मिनट से 18 सितंबर को दिन में 12 बजकर 08 मिनट तक चित्रा नक्षत्र रहेगा। तत्पश्चात् स्वाती नक्षत्र शुरू हो जाएगा। 18 सितंबर को हरितालिका तीज का व्रत रखा जाएगा। हरितालिका तीज का व्रत आजीवन रखने पर अखण्ड सौभाग्य बना रहता है। व्रत का पारण चतुर्थी तिथि के दिन किया जाता है। 

पूजा का नियम : ज्योतिषविद् ने बताया कि पूजा के अंतर्गत मिट्टी या रजत-सुवर्णादि धातु से निर्मित शिव-पार्वतीजी की मूर्ति का पंचोपचार, दशोपचार तथा षोडशोपचार पूजा करने का विधान है। भगवान् शिव व भगवती पार्वती के साथ ही सुख-समृद्धि के दाता श्रीगणेशजी की भी पूजा-अर्चना करते हैं। नैवेद्य के तौर पर विभिन्न प्रकार के सूखा मेवा, ऋतुफल, मिष्ठान्न आदि अर्पित किए जाते हैं। हरितालिका तीज से संबंधित कथा का श्रवण व पठन किया जाता है। व्रतकर्ता को दिन में शयन नहीं करना चाहिए। साथ ही परनिन्दा व व्यर्थ की वार्तालाप से भी बचना चाहिए। व्रत की रात्रि में जागरण करके देवी-देवताओं की महिमा में मंगल गायन भी किया जाता है। व्रत के दिन सौभाग्य की सामग्री व अन्य वस्तुएं भी भेंट की जाती है। इस दिन अपना ध्यान भगवान् शिव, भगवती पार्वती व श्रीगणेशजी के चरण-कमलों में ही रखकर पूर्ण मनोयोग से व्रत करना चाहिए। जिससे जीवन में अखण्ड सौभाग्य के साथ सुख-समृद्धि, खुशहाली बनी रहे। ज्योतिषविद् के अनुसार व्रत के एक दिन पूर्व भोजन करके दूसरे दिन संपूर्ण दिन निर्जला निराहार (बिना कुछ ग्रहण किए) रहा जाता है। प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नानकर स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। तत्पपश्चात् अपने आराध्य देवी-देवता के पूजनोपरान्त हरितालिका तीज के व्रत का संकल्प लेना चाहिए।  


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