विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया ने नई दिल्ली में हुई बैठक के दौरान सीटों के तालमेल पर मंथन किया, किंतु अभी तक कोई सहमति नहीं बन सकी है। इंडिया ने सीटों के तालमेल के मुद्दे को अगली बैठक तक टाल दिया है। एनसीपी प्रमुख शरद पवार के आवास पर इंडिया के समन्वय समिति की बैठक हुई, जिसमें चुनावी तैयारी के बारे में विचार-विमर्श किया गया। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इंडिया गठबंधन की अगली सार्वजनिक सभा अक्तूबर के प्रथम सप्ताह में भोपाल में होगी। बैठक में यह भी तय हुआ कि जातीय जनगणना, महंगाई, बेरोजगारी एवं मोदी सरकार के भ्रष्टाचार के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाएगा। बैठक में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब इंडिया गठबंधन भी मीडिया के बारे में अपनी नई रणनीति तय करने जा रहा है। कांग्रेस के महासचिव तथा समन्वय समिति के सदस्य केसी वेणुगोपाल ने बताया कि विपक्षी गठबंधन ने कुछ समाचार चैनल के एंकरों के कार्यक्रमों के बहिष्कार की भी सहमति जताई। इस बारे में इंडिया मीडिया से संबंधित कार्यसमूह जल्द फैसला करेगा। कार्यसमूह यह भी फैसला करेगा कि किस-किस एंकर के कार्यक्रम में इंडिया के प्रतिनिधियों को नहीं भेजना है।

बैठक में शरद पवार एवं वेणुगोपाल के अलावा द्रमुक के टीआर बालू, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव, जनता दल यू के संजय झा, आम आदमी पार्टी के राघव चड्डा, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी हिस्सा लिया। ईडी के जांच में शामिल होने के कारण अभिषेक बनर्जी समन्वय समिति की बैठक में शामिल नहीं हो सके। एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने बताया कि हम सभी लोग लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प लेकर साथ आए हैं तथा मिलकर काम करते रहेंगे। इससे पहले विपक्षी गठबंधन की पटना, बेंगलूरू तथा मुंबई में बैठकें हो चुकी हैं। मुंबई बैठक में ही समन्वय समिति का गठन हुआ था, जो सीटों के तालमेल से लेकर सभी प्रमुख मुद्दों पर विचार करेगी। इंडिया गठबंधन के सामने सबसे बड़ी समस्या सीटों के तालमेल को लेकर है। अनेक राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर कुछ जगहों पर तालमेल नहीं हो पाया तो विपक्षी पार्टियां फ्रेंडली मुकाबला कर सकती हैं। तमिलनाडु, झारखंड, पुडूचेरी, बिहार एवं महाराष्ट्र में इंडिया के सामने सीट बंटवारे को लेकर ज्यादा समस्या नहीं आ सकती है क्योंकि इन राज्यों में पहले से ही गठबंधन है। सीटों के तालमेल को लेकर उत्तर प्रदेश, पंजाब, दिल्ली एवं केरल में समस्या आ सकती है।

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी विपक्षी दलों को केवल 20 सीट ही देना चाहती है, जबकि कांग्रेस, राष्ट्रीय लोकदल एवं अपना दल (कृृष्णा पटेल) 80 में से 40 सीटें देने की मांग कर रहे हैं। इसी तरह दिल्ली और पंजाब में कांग्रेस लोकसभा की ज्यादा सीटें मांग रही हैं, जबकि आम आदमी पार्टी ज्यादा रियायत देने को तैयार नहीं है। आम आदमी पार्टी का मानना है कि दिल्ली और पंजाब में उसका ही दबदबा है, इसलिए कांग्रेस को ज्यादा रियायत देने की जरूरत नहीं है। दोनों राज्यों के स्थानीय नेता एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। इसी तरह पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का मानना है कि लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव में उसको ही ज्यादा वोट मिले हैं, इस आधार पर कांग्रेस को ज्यादा अपेक्षा नहीं रखनी चाहिए। साथ ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वामपंथी पार्टियों से तालमेल के खिलाफ हैं। केरल में कांग्रेस तथा वामपंथी पार्टी एक-दूसरे की प्रतिद्वंद्वी हैं। ऐसी स्थिति में सीटों के तालमेल के दौरान समस्या आ सकती है। यही कारण है कि इंडिया के सामने नरेन्द्र मोदी के खिलाफ सर्वसम्मत उम्मीदवार उतारने में समस्या आ सकती है। इसके अलावा वाईएसआर कांग्रेस, तेलगू देशम पार्टी, बीजू जनता दल, बहुजन समाज पार्टी, शिरोमणी अकाली दल जैसी कुछ विपक्षी पार्टियां भी इंडिया से बाहर हैं। इसका लाभ भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रित गठबंधन को मिलेगा। टीम इंडिया की राह आगे और कठिन होने वाली है।