जी-20 शिखर सम्मेलन के पहले दिन 9 सितंबर की रात राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा विदेशी मेहमानों के लिए 'भारत मंडपम में रात्रिभोज का आयोजन किया गया था। इस आयोजन में 19 देशों के प्रमुख तथा अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए थे। राष्ट्रपति भवन द्वारा इस रात्रिभोज के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्यों तथा राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी आमंत्रित किया गया था। आश्चर्य की बात यह है कि इस भोज में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखङ्क्षवदर सुक्खू के अलावा कांग्रेस का दूसरा कोई भी मुख्यमंत्री शामिल नहीं हुआ। कांग्रेस अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े तथा सोनिया गांधी को इस रात्रिभोज में आमंत्रित नहीं किए जाने से नाराज थी। कांग्रेस नेताओं ने राष्ट्रपति भवन के इस निर्णय के खिलाफ आवाज उठाकर अपनी भड़ास भी निकाली है। महत्वपूर्ण बात यह है कि हाल ही में गठित टीम इंडिया के दूसरे घटकों के मुख्यमंत्री रात्रिभोज में शामिल हुए। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरबिंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन इस भोज में शामिल हुए।
इससे स्पष्ट है कि इंडिया के दूसरे घटक दल आंख बंदकर कांग्रेस का अनुशरण करने को तैयार नहीं है। इसके कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। सबसे चर्चा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच भारत मंडपम परिसर में गर्मजोशी से मिलने को लेकर है। भेंट के दौरान दोनों ही नेता अलग अंदाज में दिखे। प्रधानमंत्री मोदी और नीतीश कुमार एक-दूसरे का अभिवादन करते दिखाई दिए। मालूम हो कि नीतीश कुमार की पार्टी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साथ थी, उस वक्त नीतीश कुमार रेल मंत्री थे। वर्ष 2013 में नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए राजग का उम्मीदवार घोषित किये जाने के बाद नीतीश कुमार ने वर्ष 2014 में राजग से अपना नाता तोड़ लिया तथा राष्ट्रीय जनता दल के नेतृत्व वाले महागठबंधन में शामिल हो गए। वर्ष 2015 में फिर से महागठबंधन की सरकार बनी, ङ्क्षकतु नीतीश कुमार ने पाला बदलते हुए वर्ष 2017 में फिर राजग का दामन थाम लिया। वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव तथा वर्ष 2020 में बिहार विधानसभा चुनाव भी नीतीश कुमार ने भाजपा के साथ मिलकर लड़ा।
अचानक अगस्त 2022 में फिर पाला बदलते हुए नीतीश कुमार लालू के शिविर में पहुंच गए। अभी वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ विपक्षी पाॢटयों को इंडिया के बैनर तले एकजुट करने में लगे हुए हैं। इंडिया की तीन बैठकें हो चुकी हैं तथा समन्वय समिति का गठन भी हो चुका है, जिसकी बुधवार को दिल्ली में बैठक होने वाली है। अब प्रश्न यह उठता है कि राष्ट्रपति के रात्रिभोज में कांग्रेस को छोड़कर दूसरे विपक्षी नेताओं के शामिल होने के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। नीतीश कुमार के प्रधानमंत्री के साथ गर्मजोशी से मिलने को लेकर तरह-तरह के अटकलों का बाजार गर्म है। प्रश्न उठ रहा है कि क्या नीतीश कुमार फिर से पलटी मारेंगे? दूसरी बात यह है कि नीतीश के साथ-साथ हेमंत सोरेन के अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडेन तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ काफी देर तक मिलना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। शायद सोरेन अपने खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोप की जांच धीमी करने के लिए प्रधानमंत्री के साथ बेहतर संबंध बनाने की कोशिश में हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय ने खडग़े को लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए आमंत्रित किया था,किंतु खडग़े व्यस्तता का बहाना बनाकर नहीं गए। हो सकता है कि इसका कनेक्शन वर्तमान रात्रिभोज से हो। कुल मिलाकर विपक्षी दलों के बीच अविश्वास का वातावरण पैदा हुआ है जिसका असर समन्वय समिति की बैठक के दौरान सीटों के तालमेल पर दिखाई दे सकता है।