हिन्दू सनातन धर्म में व्रत त्यौहार की परंपरा काफी पुरातन है। भारतीय सनातन धर्म में जया एकादशी तिथि अपने आप में अनूठी मानी गई है। धाॢमक मान्यता के अनुसार समस्त पापों का नाश करने वाली इस एकादशी व्रत का फल अश्ïवमेध यज्ञ से मिलने वाले फल से अधिक पुण्इललदाई होता है। इस बार भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की एकादशी तिथि अजा/जया एकादशी के रूप में मनाई जाएगी। पौराणिक मान्यता—जो मनुष्य इस दिन भगवान ऋषिकेश की पूजा-अर्चना अथवा व्रत को करता है उसे वैकुंठ की प्राप्ति बतलाई गई है। जया एकादशी का महत्व भगवान श्री कृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिïर से कहा था। ज्योतिषविद्  विमल जैन जी ने बताया कि भाद्रपद कृष्णपक्ष की एकादशी तिथि 9 सितंबर, को सायं 7 बजकर 19 मिनट पर लग रही है जो 10 सितंबर, रविवार को रात्रि 9 बजकर 29 मिनट तक रहेगी।

इस दिन पुनर्वसु नक्षत्र दिन में 2 बजकर 26 मिनट से 10 सितंबर को सायं 5 बजकर 07 मिनट तक रहेगा। तत्पश्ïचात पुष्य नक्षत्र शुरु हो जाएगा। स्मार्तजन एवं वैष्णवजन 10 सितंबर, को जया एकादशी का व्रत रखेंगे।

भगवान श्रीहरि की पूजा का विधान :  विमल जैन ने बताया कि व्रतकर्ता को स्नान कर स्वच्छ वस्ïत्र धारण करना चाहिए। अपने आराध्य देवी-देवता की पूजा-अर्चना के उपरान्त जया एकादशी व्रत का संकल्प लेना चाहिए, और दूसरे दिन यानि जया एकादशी के दिन व्रत रखकर भगवान श्रीविष्णुजी की पूजा-अर्चना के पश्चात् उनकी महिमा में श्रीविष्णु सहस्रनाम, श्रीपुरुषसूक्त तथा श्रीविष्णुजी से सम्बन्धित मन्त्र ' श्रीविष्णवे नम:',  नमो भगवते वासुदेवाय' या  अच्युताय नम: का जप अधिक से अधिक संख्या में करना चाहिए। संपूर्ण दिन निराहार रहकर व्रत संपादित करना चाहिए। व्रत का पारण द्वादशी तिथि के दिन किया जाता है।

व्रत के दिन क्या न करें : चावल का सेवन, दिन में शयन, हास-परिहास एवं व्यर्थ वार्तालाप। ऐसी मान्यता है कि जया एकादशी के व्रत व भगवान श्रीविष्णुजी की विशेष कृपा से सभी मनोरथ सफल होते हैं, साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि, आरोग्य की प्राप्ति होती है। अपने जीवन में मन-वचन कर्म से पूर्णरूपेण शुचिता बरतते हुए यह व्रत करना विशेष फलदाई रहता है। आज के दिन ब्राह्मण को यथा सामथ्र्य दक्षिणा के साथ दान करके उनसे आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।


ज्योतिॢवद् विमल जैन

मो.: 09335414722