लोकसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही सत्तापक्ष एवं विपक्ष के बीच हर मुद्दे पर टकराव बढ़ता जा रहा है। फिलहाल इंडिया और भारत के मुद्दे पर विपक्षी दलों तथा भाजपा के बीच संग्राम छिड़ा हुआ है। जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान 9 सितंबर की रात को राष्ट्रपति भवन द्वारा अति महत्वपूर्ण व्यक्तियों के लिए रात्रिभोज का आयोजन किया गया है। राष्ट्रपति भवन द्वारा भेजे गए निमंत्रण पत्र में प्रेसीडेंट ऑफ इंडिया की जगह प्रेसीडेंट ऑफ भारत लिखा हुआ है। इसको लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच वाकयुद्ध शुरू हो गया है। कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने कहा है कि भारत सरकार का यह कदम राज्यों के संघ पर हमला है। कांग्रेस के दूसरे नेता शशि थरूर ने ट्वीट कर कहा है कि इंडिया को भारत लिखने में कोई संवैधानिक आपत्ति नहीं है ङ्क्षकतु इंडिया और भारत दोनों का इस्तेमाल होना चाहिए।

आम आदमी पार्टी का कहना है कि उनकी पार्टी को भारत और इंडिया दोनों पर गर्व है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि 28 पाॢटयों के गठबंधन का नाम इंडिया रखे जाने से नरेन्द्र मोदी सरकार डर गई है। इंडिया नामकरण होने के बाद से ही भाजपा हमलावर है। दूसरी तरफ भाजपा का कहना है कि भारत का इंडिया नाम गुलामी का प्रतीक है। भाजपा के राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने इंडिया नाम को औपनिवेशिक दासता का उदाहरण बताया है। असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने अपने पोस्ट में रिपब्लिक ऑफ भारत लिखा है। विदेश राज्यमंत्री मिनाक्षी लेखी ने विष्णु पुराण को उद्धृत करते हुए कहा है कि भारत नाम बहुत पहले से है। भाजपा सांसद हरिनाथ ङ्क्षसह यादव ने इंडिया शब्द हटाने के लिए संविधान में संशोधन करने की मांग की है। भारत और इंडिया का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। नरेन्द्र मोदी सरकार अंग्रेजों के समय बनाए गए कानूनों तथा अन्य जगहों पर उपस्थित उनके चिन्हों को हटाने के लिए प्रयासरत है।

हाल ही में सीआरपीसी सहित कुछ कानूनों को बदला गया है, जो अंग्रेजों के जमाने से चल रहे थे। सरकार का कहना है कि दुनिया के अधिकांश देशों का नाम अंग्रेजी तथा वहां की राष्ट्रभाषा में एक समान है। 18 सितंबर से संसद के दोनों सदनों का विशेष सत्र शुरू होने जा रहा है। हो सकता है कि 'वन नेशन वन इलेक्शनÓ के साथ-साथ इंडिया की जगह भारत शब्द का इस्तेमाल करने के लिए सरकार संसद में कोई विधेयक ला सकती है। अभी तक इस बारे में कोई स्पष्ट राय उभर कर सामने नहीं आई है, क्योंकि केंद्र सरकार जी-20 शिखर सम्मेलन की तैयारी में व्यस्त है। सुपर स्टार अमिताभ बच्चन एवं भारत के पूर्व आक्रामक बल्लेबाज वीरेन्द्र सहवाग ने भी ट्वीट कर अंग्रेजी में भारत शब्द का इस्तेमाल करने का समर्थन किया है।

केंद्र सरकार पहले भी कई जगहों का नाम बदल चुकी है। राष्ट्रपति भवन के निमंत्रण पत्र में इंडिया की जगह भारत शब्द का इस्तेमाल यह संकेत दे रहा है कि मोदी सरकार इस दिशा में आगे बढऩे वाली है। वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना एवं मिजोरम में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसी स्थिति में विपक्ष तथा सरकार कोई भी मुद्दा अपने हाथ से जाने देने को तैयार नहीं हैं। सनातन धर्म के मुद्दे पर भी भाजपा एवं ङ्क्षहदू संगठनों तथा विपक्ष के बीच वाकयुद्ध छिड़ा हुआ है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन के बेटे द्वारा सनातन धर्म पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर पूरे देश में बवाल मचा हुआ है। ङ्क्षहदू साधु-संत इसे धर्म का अपमान मानकर इस बयान के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं।

विपक्षी पार्टियों का मानना है कि इंडिया की जगह भारत शब्द का इस्तेमाल होने से उनकी अगली रणनीति प्रभावित होगी। भाजपा ने तो इंडिया गठबंधन को घमंडिया गठबंधन बताना शुरू कर दिया है। विपक्षी नेताओं की तीन बैठकें हो चुकी हैं ङ्क्षकतु अभी तक सीटों के तालमेल के मुद्दे पर बात आगे नहीं बढ़ पा रही है। अब इंडिया और भारत का मुद्दा चुनावी मुद्दा बन चुका है, जिसका लाभ उठाने के लिए सत्तापक्ष एवं विपक्ष दोनों मैदान में कूद चुकी है।