एक तरफ चीन भारत के साथ अच्छे संबंध बनाने की बात करता है तो दूसरी तरफ चालबाजी करने से बाज नहीं आता। हाल ही में दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में हुए ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अनौपचारिक बैठक हुई थी, जिसमें सीमा पर चल रहे तनाव को कम करने तथा विवादित मुद्दों को सुलझाने के लिए सहमति बनी थी। जिनपिंग भारत में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आने वाले हैं। मालूम हो कि आगामी 9 और 10 सितंबर को नई दिल्ली में विश्व के बड़े नेताओं का जमावड़ा होने जा रहा है। जिनपिंग की यात्रा से एक सप्ताह पहले चीन ने एक विवादित नक्शा जारी कर भारत के अरुणाचल प्रदेश एवं अक्साई चिन को चीन का हिस्सा बताया है। अरुणाचल को चीन दक्षिण तिब्बत का हिस्सा मानता है। चीन ने अपने नक्शे में ताईवान, दक्षिण चीन सागर के बड़े हिस्से को भी अपना भाग माना है। मालूम हो कि दक्षिण चीन सागर के जिस हिस्से पर चीन ने अपना दावा किया है उसको उसके पड़ोसी देशों वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया, ब्रूनोई एवं इंडोनेशिया भी अपना हिस्सा मानता है।
चीन ने भारत के 11 जगहों का नाम भी बदल कर चीनी नाम रख दिया है। चीन की इस चालबाजी ने उसके नीयत को उजागर कर दिया है। चीन एक ऐसा कुटिल देश है जिस पर विश्वास नहीं किया जा सकता है। चीन की विस्तारवादी नीति से दुनिया वाकिफ है। कमजोर देशों को अपने कर्जजाल में फंसाकर ड्रैगन उसकी अर्थव्यवस्था एवं संसाधनों पर कब्जा कर लेता है। दुनिया में भारत के बढ़ते रुतबे को देखते हुए चीन परेशान है। जी-20 की सफलता से चिढ़ा चीन भारत की बढ़ती शक्ति को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है। भारत अभी ग्लोबल साउथ का लीडर बन गया है, जिसे चीन पचा नहीं पा रहा है। भारत से दुश्मनी मोल लेने के बाद चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग की साख लगातार गिर रही है। वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुए झड़प के बाद दोनों देशों के बीच 19 दौर की कमांडर स्तर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन उसका कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है। भारत पूरी चीनी सीमा पर चीन के सामने मजबूती से डटा हुआ है तथा अपनी सामरिक स्थिति लगातार मजबूत कर रहा है। चीन को अनुमान था कि उसकी बड़ी मिलिट्री पावर देखकर भारत झुक जाएगा, किंतु भारत ने एक-एक कर चीन की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए कदम उठाया।
इसका नतीजा यह हुआ है कि आज चीन की अर्थव्यवस्था की प्रगति की रफ्तार कम हो गई है तथा अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। चीन चाहता है कि भारत उसके साथ अच्छा से व्यापार करे किंतु वह सीमा पर अपनी मनमानी करता रहे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नए भारत की नीति बदली हुई है जिसका अनुमान चीन को नहीं था। जिस तरह चीन भारत को घेरने में लगा है उसी तरह भारत भी हर मोर्चे पर चीन को उसी की भाषा में करारा जवाब दे रहा है। अमरीका और पश्चिमी देशों के सहयोग से भारत अपनी सामरिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ चीन के कारोबार पर भी चोट कर रहा है। साथ ही चीन के पड़ोसी देशों को हथियार एवं अन्य रक्षा सामान देकर मजबूत कर रहा है ताकि वे चीन के खिलाफ तन कर खड़ा हो सके। भारत को चीन के षड्यंत्र के प्रति हमेशा सावधान रहना होगा।