लोकसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही राजनीतिक पाॢटयों में हलचल तेज हो गई है। नए-नए समीकरण बनने लगे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को पटखनी देने के लिए 26 विपक्षी पाॢटयों ने इंडियन नेशनल डेमोक्रेटिव इन्क्लूसिव एलायंस (इंडिया) का गठन किया है। विपक्षी नेताओं की पहली बैठक पटना में हुई थी, जिसमें संयुक्त गठबंधन बनाने पर सहमति बनी थी। विपक्षी नेताओं की दूसरी बैठक बेंगलुरु में हुई थी जिसमें नए गठबंधन का नाम इंडिया रखा गया। दूसरी बैठक को कांग्रेस ने पूरी तरह हाईजैक कर लिया था, क्योंकि उसमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े एक साथ उस बैठक में शामिल हुए थे। उसके बाद से ही यह अनुमान लगाए जाने लगा कि कांग्रेस इस गठबंधन का नेतृत्व करेगी। इसका नतीजा यह हुआ कि इस गठबंधन के सूत्रधार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नाराज हो गए। अब तीसरी बैठक 1 सितंबर को मुंबई में होने जा रही है, जो काफी अहम होगी। यह बैठक इंडिया के भविष्य को तय करेगी। तीसरी बैठक में गठबंधन के चेयरमैन एवं संयोजक का ऐलान हो सकता है।
इसके साथ ही सीटों के बंटवारे के मुद्दे पर सहमति बनाने का प्रयास होगा। इस दौरान सीट बंटवारे के किसी फॉर्मूले पर पहुंचने के लिए मंथन होगा, जो कठिन चुनौती है। कांग्रेस पहले से ही स्पष्ट कर चुकी है कि राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक एवं गुजरात जैसे राज्यों में विपक्षी पाॢटयों को कांग्रेस को समर्थन करना चाहिए। कांग्रेसी नेता पहले ही कह चुके हैं कि उनकी पार्टी दिल्ली की सभी सात लोकसभा सीटों पर चुनाव लडऩे की तैयारी कर रही है। दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी के नेताओं का कहना है कि कांग्रेस को पंजाब और दिल्ली को उनकी पार्टी के लिए छोड़ देना चाहिए। आम आदमी पार्टी ने तो अब राजस्थान, छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर दी है। अरङ्क्षवद केजरीवाल ने छत्तीसगढ़ में अपना प्रचार अभियान शुरू भी कर दिया है। केजरीवाल ने भूपेश बघेल सरकार को भ्रष्टाचारी तक बता दिया है। ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में कांग्रेस तथा वामपंथी दलों को देखना नहीं चाहती।
कांग्रेस के नेता आचार्य प्रमोद कृृष्णन ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अगर इंडिया को भाजपा से मुकाबला करना है तो राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के लिए विपक्ष का चेहरा घोषित कर देना चाहिए। अगर राहुल तैयार नहीं होते हैं तो प्रियंका गांधी या मल्लिकार्जुन खडग़े को चेहरा बनाया जाना चाहिए। विपक्षी पार्टियों के नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री के उम्मीदवार का फैसला चुनाव के बाद कर लिया जाएगा, ङ्क्षकतु कांग्रेस इसे पचाने को तैयार नहीं है। कांग्रेसी नेताओं ने अभी से ही राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है।
आम आदमी पार्टी ने अरङ्क्षवद केजरीवाल को तथा तृणमूल कांग्रेस ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री का मैटेरियल बता रही है। संसद में दिल्ली सेवा कानून बनने के बाद आम आदमी पार्टी के रुख में बदलाव आ गया है, क्योंकि पार्टी का मानना है कि कांग्रेस ने राज्यसभा में दिल्ली सेवा विधेयक को रोकने में सक्रिय भूमिका नहीं निभाई। विपक्षी नेताओं के कुनबे में मायावती की बहुजन समाज पार्टी को भी शामिल करने का प्रयास चल रहा है। अगर ऐसा हुआ तो समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी तथा कांग्रेस के बीच घमासान होना तय है। बिहार में महागठबंधन के दोनों घटकों राष्ट्रीय जनता दल एवं जनता दल-यू के बीच सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा है। पिछले कुछ महीनों से दोनों पाॢटयों के बीच खटास बढ़ी है। इसका असर सरकार की सेहत पर भी पड़ रहा है। देश की 10 से ज्यादा विपक्षी पाॢटयां अभी भी राजग और इंडिया दोनों से बाहर हैं। मुंबई की बैठक यह साबित करेगा कि विपक्षी गठबंधन आगे कितना कारगर होगा।