भारत की राजधानी नई दिल्ली में 9 एवं 10 सितंबर को आयोजित होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन की तैयारी युद्ध स्तर पर चल रही है। बाहर से आने वाले राष्ट्राध्यक्षों, शासनाध्यक्षों एवं दूसरे वीआईपी अतिथियों की सुरक्षा के लिए कई स्तरीय सुरक्षा-व्यवस्था की जा रही है। मालूम हो कि भारत इस वर्ष जी-20 शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहा है। भारत इस शिखर सम्मेलन को ऐतिहासिक बनाना चाहता है, ताकि इसका लाभ दूसरे विकासशील देशों को भी मिल सके। इस सम्मेलन में 19 देश तथा यूरोपीय यूनियन सदस्य हैं। यूक्रेन के साथ चल रहे युद्ध के कारण रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इसमें भाग लेने के लिए भारत नहीं आ रहे हैं। अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की सुरक्षा के लिए सबसे ज्यादा तैयारी की जा रही है। बाइडेन अपने साथ 400 सदस्यीय टीम लेकर नई दिल्ली पहुंच रहे हैं।

उनके लिए आईटीसी मौर्य होटल के 14वीं मंजिल पर प्रेजिडेंशियल सुइट बुक है। उस होटल में 400 कमरे अमरीका के नाम पर बुक हैं। बाइडेन के साथ आ रहे 400 सदस्यों में 300 अमरीकी सीक्रेट सर्विस के कमांडो भी हैं। जिस गाड़ी से बाइडेन होटल से सम्मेलन स्थल तक जाएंगे, वह भी अमरीका से ही आ रही है। इस गाड़ी पर आईईडी ग्रेनेड, हल्के मिसाइल हमले का कोई असर नहीं होता है। इसका चक्का भी बुलेट प्रूफ है। इसी तरह चीन के राष्ट्रपति शी जिनङ्क्षपग के लिए नई दिल्ली के होटल ताज में कमरे बुक किया हुआ है। जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए दिल्ली के कुल 23 तथा एनसीआर के कुल नौ होटल को सुरक्षा बलों ने अपने कब्जे में ले लिया है, जहां विदेशी मेहमानों को ठहराया जाएगा।

होटल से लेकर सम्मेलन स्थल तक सुरक्षा के लिए 1000 जवानों को प्रशिक्षण देकर तैयार रखा गया है। इसमें एसपीजी तथा एनएसजी में काम कर चुके पूर्व जवानों का शामिल किया गया है। गृह मंत्रालय के निर्देश पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस इन जवानों को प्रशिक्षण दे रही है। इन प्रशिक्षित जवानों की 50 टीम बनाकर काम में लगाया जाएगा। आईटीपीओ कन्वेंशन सेंटर प्रगति मैदान में भारत मंडपम में सुरक्षा-व्यवस्था के लिए प्रगति मैदान में 4500 तथा आसपास 1300 जवानों को तैनात किया जा रहा है। सभी होटलों जहां वीआईपी ठहरेंगे वहां 24 घंटे 360 डिग्री की सुरक्षा-व्यवस्था रहेगी। कई होटलों के छत पर हेलीकॉप्टर उतरने की संभावना तलाशी जा रही है।

सदस्य देशों के अलावा नौ अन्य देशों को भी अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जा रहा है। भारत इस महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय मंच से वसुधैव कुटुम्बकम नीति के तहत पूरे विश्व के कल्याण के लिए एक ठोस संदेश देना चाहता है। आॢथक मंदी की दौर से गुजर रहे दुनिया के विकासशील और पिछड़े देश भारत की तरफ आशा भरी नजरों से देख रहे हैं। जी-20 के सदस्य देश आॢथक रूप से काफी समृद्ध देश हैं। वे ऐसे विकासशील देशों के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं। भारत अपने नेतृत्व में कुछ ऐसे फैसले लेना चाहता है जिससे जरुरतमंद देशों को राहत मिले।